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दिल्ली के बर्खास्त कांस्टेबल की सेवा सुप्रीम कोर्ट ने की बहाल, सबूत के अभाव में लिया फैसला


सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि बिना विभागीय जांच के किसी सरकारी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करने की शक्ति केवल इस अनुमान के आधार पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती कि ऐसी जांच करना व्यावहारिक नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि विभागीय जांच को छोड़कर सीधे बर्खास्त करने का निर्णय कुछ ठोस सामग्री (प्रासंगिक सबूत) पर आधारित होना चाहिए।
क्या था पूरा मामला? – जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने दिल्ली पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की अपील पर सुनवाई की। डीसीपी ने यह मानते हुए कॉन्स्टेबल को बिना विभागीय जांच के ही सेवा से बर्खास्त कर दिया था कि मामले में विभागीय जांच कराना व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहा आरोपी गवाहों को धमका या प्रभावित कर सकता है।
DCP की रिपोर्ट में नहीं मिला कोई ठोस सबूत – सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च को हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कॉन्स्टेबल की सेवा बहाल कर दी थी और कहा था कि हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी को सही ठहराकर गलती की। Delhi police , Delhi news , Delhi hindi news , supreme court timings , supreme court on Dismissal without inquiry , Delhi Police constable dismissal case , Delhi high court , ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 311(2) के दूसरे प्रावधान के क्लॉज (b) के तहत बिना जांच के बर्खास्त करने की शक्ति केवल तभी इस्तेमाल की जा सकती है, जब वास्तव में विभागीय जांच करना व्यावहारिक रूप से संभव न हो। इसके अलावा ऐसा निर्णय प्रासंगिक सामग्री के आधार पर होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी पाया कि DCP की रिपोर्ट में ऐसा कोई ठोस उदाहरण नहीं दिया गया था।