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ग्रीन पार्टी ने सैंडर्स को लॉलीपॉप दिया

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इसमें कोई संदेह नहीं कि चुनावी राजनीति रोजाना करवट बदलती है। इसमें नित नए समीकरण बनते हैं। इसी संबंध में द गार्जियन के साभार से जानकारी मिली है कि ग्रीन पार्टी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बर्नी सैंंडर्स के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। इस पार्टी ने सैंडर्स से कहा है कि वह व्हाइट हाउस में जाने के लिए होने वाली बिड में भाग लेने के लिए तैयार रहें। वह उन्हें अपना समर्थन देगी। गौर करने की बात है कि बर्नी सैंडर्स ने जब रिपब्ल्किन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ हिलेरी क्लिंटन को समर्थन देने की घोषणा की थी तब उन्होंने यह भी कहा था कि वह राष्ट्रपति पद की दौड़ में बने रहेंगे। संभव है ग्रीन पार्टी उन्हें उनका वजूद याद दिला रही है।

उम्मीद है कि जिल स्टीन अगस्त के महीने में हॉस्टन में होने वाली पार्टी की कन्वेन्शन का समर्थन करेंगी। वे कहती हैं कि सैंडर्स के जबरदस्त वोट समर्थक हैं, वे ग्रीन पार्टी के साथ उनके लिए जुड़ रहे हैं, न कि हिेलेरी के लिए। वे जोर देती हैं कि राष्ट्रपति पद के लिए उनकी बिड व्यावहारिक है और नेशनल पोलिंग में 15 प्रतिशत के लक्ष्य के बिल्कुल समीप है। इससे वह टेलीविजन पर प्रसारित होने वाली चुनावी बहस के दौरान राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार ट्रंप के साथ खड़ी हो सकेंगी। इससे रिपब्ल्किन पार्टी के लिए अस्थिरता पैदा होगी और सैंडर्स के समर्थकों के लिए उत्सुकता की स्थिति बन जाएगी। स्टीन दोहराती हैं कि उनकी सैंडर्स के पक्ष में साथ देने की प्रबल इच्छा है।

स्टीन के मुताबिक उन्होंने बर्नी को आमंत्रित किया है कि वे आएं और बैठकर सहयोग की नई संभावनाओं की खोज करें। यदि उन्हें लगेगा कि सैंडर्स क्रांतिकारी अभियान नहीं चला सकते है तो ग्रीन पार्टी टिकट के लिए नेतृत्व अपने हाथ में ले लेगी और राजनीतिक आंदोलन चलाएगी। बर्नी सैंडर्स को भेजे गए इस आमंत्रण वाले ई मेल का उन्हें जवाब नहीं मिला है। इस बीच हस्तक्षेप करने पर उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि उनका अनुमान सही निकला कि इस मुकाबले में अगले सप्ताह डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में होने वाली बिड में सैंडर्स् ने क्लिंटन को समर्थन देने का फैसला कर ही लिया है।

वह आशंका जताती हैं कि यदि सैंडर्स ने डेमोक्रेटिक पार्टी में अपना पूरा विश्वास जता दिया तो उनके कई समर्थक निराश होकर उनसे किनारा कर लेंगे। यह जो राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं उसमें बर्नी स्वयं ही नहीं कब्र में जाएंगे, अपने साथ हिलेरी को भी दफन कर लेंगे। स्टीन का मानना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने सैंडर्स के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक युद्ध आरंभ कर दिया है, उसकी कोशिश तोड़ फोड़ करने की है, ताकि उनकी पार्टी राष्ट्रपति पद के नामांकन करवाने में कामयाब न हो जाए। उनके कई युवा और प्रगतिशील समर्थक अब ग्रीन पार्टी में आ रहे हैं, इसके बजाय कि वे क्लिंटन के खेमे में शामिल हो जाएं।

जिल स्टीन दावा करती हैं कि वह इस चुनाव में 43 मिलियन युवाओं को ला सकती हैं। यह बड़ा अद्भुत चुनाव है, सारे नियमों की अवहेलना हो रही है। विडंबना है कि इन नियमों का इस्तेमाल ट्रंप जैसे खतरनाक लोगों को लाने के लिए किया जा रहा है। लेकिन इनका इस्तेमाल लोगों की जरुरत क्या है इसका जवाब तलाशने के लिए भी किया गया है।

स्टीन पहले मैस्साचुएट्टस में डाक्टर थीं, बाद मे वह पर्यावरणविद एक्टाविस्ट बन गईंं। वे युवा वोटरों का समर्थन पाने का प्रयास कर रही हैं। उनका वादा है कि कॉलेज शिक्षा को मुफ्त किया जाएगा। जबकि सैंडर्स ने छात्रों से उनके सारे कर्जे माफ करने का इरादा जताया है। स्टीन की जलवायु परिवर्तन की नीति अधिक महत्वाकांक्षी है, वे 100 प्रतिशत बिजली देने की व्यवस्था का नवीनीकरण करने के पक्ष में हैं। क्लिंटन की तुलना में वैदेशिक मामलों में कम हस्तक्षेप को प्रमुखता देना चाहती हैं।

इस चुनाव में जिल स्टीन 15 प्रतिशत वोट पाकर टेलीविजन पर प्रसारित होने वाली चुनाव बहस में जगह बनाने में कामयाब तो हो गई हैं, लेकिन वह अपनी ग्रीन पार्टी के लिए 5 प्रतिशत चंदा तक सुरक्षित नहीं कर पाई हैं।

वर्ष 2012 में उन्होंने ग्रीन पार्टी के उम्मीदवार के रूप में 470,000 वोट प्राप्त किए थे। इस बार 4 से 6 प्रतिशत ही वोट पा सकी हैं। देखा गया है कि 10 में से 9 वोटर स्टीन के बारे में जानते ही नहीं। गार्जियन की ओर से किए गए सर्वे में पाया गया कि अगर यह पक्का हो जाएगा कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में हिलेरी का नामांकन होना तय है तो सैंडर्स के समर्थकों की बड़ी संख्या क्लिंटन की ओर जाने के लिए तैयार हैं।

द वर्जीनिया सेंटर आॅफ पॉलिटिक्स यूनिवर्सिटी के सबसे अनुभवी राजनीतिक वैज्ञानिक लैरी सबाटो को उम्मीद है कि बर्नी सैंडर्स के ज्यादातर समर्थक क्लिंटन के पक्ष में आ जाएंगे। वे कहते हैं कि जैसा कि देखा जा रहा है कि वोटरों का ध्रुवीकरण में ट्रंप या क्लिंटन ही रहेंगे। इनमें ज्यादातर लोग क्लिंटन की ओर ही जाना पसंद करेंगे। हां, संभव है कि बर्नी के कुछ वोट स्टीन ले जाएंं, पर हिलेरी को अधिक वोट मिलेंगे, इसलिए नहीं कि लोग हिलेरी से प्यार और ट्रंप से नफरत करते हैं। सबाटो का आकलन है कि ग्रीन पार्टी को जितने भी वोट मिलेंगे उनका इतना प्रभाव नहीं होने वाला है। यह वर्ष 2000 की तरह शोर मचा रही है। उस समय ग्रीन पार्टी उम्मीदवार राल्फ नाडार को 2.9 मिलियन वोट मिले थे और जॉर्ज डब्ल्यू बुश राष्ट्रपति बन गए। लोग जानते हैं कि तब क्या हुआ था।

स्टीन ने वर्ष 2012 में मिट रोमनी को मैस्साचुएट्टस का गवर्नर बनने के लिए चुनौती दी, उसमें वह असफल हो गई थीं। वे कह रही हैं कि क्लिंटन की नीतियों ने युवा वोटरों को उनके प्रति अरुचिकर बना दिया है। पर्यावरण संकट को हिलेरी सफलतापूर्वक दूर कर देंगी ऐसा उन पर विश्वास करना मूर्खता होगी। गणना के दिन समीप आते जा रहे हैं। ट्रंप कहते हैं कि युद्ध को भड़काने वाला और नव उदारतावाद का जो माहौल बन रहा है उससे हिलेरी बुरी तरह डर गई हैं, ऐसे मौकों पर यह उनका भयभीत होने का रिकार्ड रहा है।

अमरीका की कई विधानसभाओं में ग्रीन पार्टी के सदस्य चुनाव जीते हैं, लेकिन इसका संघीय राजनीति में कोई रिेकार्ड नहीं है। इस पर स्टीन का कहना है कि अमरीका में चुनाव व्यवस्था ऐसी बना दी गई है, ताकि विपक्ष हमेशा दबा कुचला रहे, अपनी आवाज उठा ही न सके। राजनीतिक वैज्ञानिक लैरी सबाटो बताते हैं कि सन 1880 मे जब रिपब्ल्किन पार्टी की स्थापना हुई थी तब से कोई तीसरी दल उभर कर अपनी प्रमुखता साबित नहीं कर पाया। देश में यदि संसदीय प्रणाली होती तब ग्रीन पार्टी आज प्रतिनिधित्व कर रही होती।

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