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‘इजरायल की सेना ढह जाएगी’, हमास से लेकर ईरान तक से 900 दिनों से जंग लड़ रहे IDF के चीफ ने दी चेतावनी


एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रही इजरायल की सेना (IDF) एक बड़े संकट से जूझ रही है और इसका हल न निकाला गया तो जल्द ही ढह सकती है। इजरायली सेना के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने इसी सप्ताह बुधवार को हुई सुरक्षा कैबिनेट में मैनपावर की कमी को लेकर चेतावनी दी। कैबिनेट की बैठक के दौरान जमीर ने कहा कि IDF के अपने ही अंदर ढहने से पहले मैं 10 रेड फ्लैग उठा रहा हूं।
900 दिनों से जंग लड़ रही IDF – इजरायली सेना 900 दिनों से ज्यादा समय से लगातार सैन्य अभियानों में उलझी हुई है। हाल ही में ईरान और लेबनान के खिलाफ युद्ध के चलते कई मोर्चे खुल गए हैं, जिससे मैनपावर की भारी कमी ने चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ाती है, तो कुछ जगहों पर बड़े सुरक्षा गैप रह जाएंगे।
इजरायल को सिर्फ अभी नहीं, बल्कि शांति के समय में भी गाजा, लेबनान, सीरिया और वेस्ट बैंक की सीमाओं पर ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी। इजरायली सेना में हरेदी (अतिरूढ़िवादी यहूदियों) भर्ती को बढ़ाने के लिए अभी तक कोई कानून नहीं बनाया गया है, जिससे देश में हजारों लोग अनिवार्य सेना से छूट पा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह हरेदी समुदाय को दी गई छूट से जुड़ा राजनीतिक दबाव है।
इजरायली सेना प्रमुख ने बताया खतरा – रिजर्व सैनिकों पर एक ही समय में कई सक्रिय मोर्चों पर इतना ज्यादा दबाव पड़ रहा है कि वे टूट सकते हैं। ये मोर्चे हैं- गाजा, लेबनान, सीरिया, वेस्ट बैंक और ईरान।
अति-रूढ़िवादी यहूदियों की अनिवार्य भर्ती के लिए कोई कानून पास नहीं किया गया है, जिससे हजारों लोग अनिवार्य सेवा से दूर हैं।
कैबिनेट ने वेस्ट बैंक में दर्जनों चौकियों और फार्म को कानूनी दर्जा देने की मंजूरी दे दी है, जिनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत होगी।
वेस्ट बैंक में यहूदी राष्ट्रवादी हिंसा तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते वहां अतिरिक्त बटालियन की तैनाती करनी पड़ी है। जल्द ही एक बटालियन की जरूरत हो सकती है।
जनवरी 2027 से अनिवार्य सेवा की अवधि घटाकर 30 महीने की जानी है, जो IDF की मांग के उलट है जिसमें इसे बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की गई है।
सरकार जरूरी कानून (अनिवार्य भर्ती, रिजर्व सैनिक, सेवा विस्तार) पास करने से बच रही है, जिसकी मुख्य वजह हरेदी समुदाय को दी गई छूट को लेकर राजनीति है।