
पाकिस्तान और सऊदी अरब में बुधवार को हुए रक्षा समझौते की दुनियाभर में चर्चा है। ये समझौता नाटो देशों की आपसी सुरक्षा गारंटी की तरह है। इसमें सऊदी या पाकिस्तान में से किसी एक पर हमले को दूसरा देश खुद पर हमला मानेगा। यानी अगर पाकिस्तान पर कोई अटैक होता है तो सऊदी उसे खुद पर हमला मानते हुए सामने आकर प्रतिक्रिया देगा। पाकिस्तान और सऊदी में सैन्य सहयोग दशकों पुराना है लेकिन नए समझौते की कुछ शर्तें भारत का ध्यान खींच रही हैं।
पाकिस्तान और सऊदी के सैन्य संबंध कई दशक पुराने हैं। इनमें एक अहम पड़ाव 1979 में देखने को मिला था। साल 1979 में मक्का में एक आतंकी गुट ने मस्जिद अल हरम पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद सऊदी ने पाकिस्तानी आर्मी से मदद मांगी थी। इसके बाद पाक आर्मी ने सऊदी सेना के साथ मिलकर मस्जिद को बचाया था। इसके बाद खाड़ी युद्ध के दौरान भी पाक आर्मी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Home / News / मक्का को बचाने के लिए आतंकियों से भिड़ गई थी पाकिस्तान सेना… सऊदी प्रिंस MBS ने यूं ही नहीं किया NATO जैसा रक्षा समझौता
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