
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया जाने वाले सैकड़ों जहाज अलग-अलग भारतीय बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। ये वो जहाज हैं, जिन्हें या तो होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से बीच रास्ते वापस लौटना पड़ा। या फिर वो जहाज हैं, जो लड़ाई शुरू होने की वजह से कूच ही नहीं कर पाए हैं।
ऐसे जहाजों को राहत देने के लिए शिपिंग मंत्रालय ने बंदरगाहों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समुद्री यातायात ठप होने की वजह से इन भारतीय मालवाहकों का नुकसान बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शिप ऑपरेटरों की ओर से जो रियायतों के अनुरोध आए हैं, उनपर उचित तरीके से विचार करके उन्हें राहत दें।
सरकार के इस फैसले से खाड़ी की ओर रवाना हुए इन जहाजों को उन भारतीय बंदरगाहों पर भी डॉक करने की छूट मिली है, जहां से उन्होंने यात्रा नहीं शुरू की थी।
शिपिंग मिनिस्ट्री ने कहा है कि भारतीय बंदरगाहों पर 11 जहाज फारस की खाड़ी जाने के लिए खड़े हैं और इनके अलावा भी इन इलाकों में 35 और भारतीय जहाज रूके हुए हैं।
पश्चिम एशिया जाने वाले जहाजों के लिए एसओपी जारी – अधिकारियों का कहना है कि शिपिंग मिनिस्ट्री की ओर से पश्चिम एशिया के बंदरगाहों की ओर जाने वाले शिपमेंट से लोड सभी जहाजों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर भी जारी किया गया है। इन्हें जिन चीजों पर छूट देने को कहा गया है या कम शुल्क लिए जाने हैं, उनका उस बंदरगाह पर मौजूद स्थिति के अनुसार मूल्यांकन किया जा रहा है।
बिना एंट्री बिल भरे कार्गो अनलोड करने की अनुमति – मंत्रालय ने भारतीय जहाजों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी बंदरगाहों पर एक नोडल ऑफिसर नियुक्त किए हैं, ताकि मालवाहको जहाजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कंटेनरों को समुद्री ट्रमिनल पर बिना एंट्री बिल भरे कार्गो अनलोड करने की भी अनुमति दी जा रही है। हालांकि, ये सुविधाएं संबंधित दस्तावेजों की पूरी पड़ताल के बाद ही मिल रही हैं।
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