
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ट्रंप का यह फैसला भारत के लिए बुरी खबर माना जा रहा है। इन संगठनों में भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance ISA) भी शामिल है, जिसे भारत की प्रमुख जलवायु कूटनीतिक पहल माना जाता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इन संस्थाओं को अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के विपरीत करार देते हुए उनमें भागीदारी और वित्तपोषण समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका का ISA से अलग होना भारत के उस प्रयास को झटका है, जिसके तहत वह विकासशील देशों में स्वच्छ ऊर्जा, सौर निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दे रहा था। इनमें 31 संयुक्त राष्ट्र निकाय और 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन शामिल हैं, जिनमें भारत-फ्रांस की संयुक्त पहल अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भी है।
भारत पर संभावित असर – ISA भारत की वैश्विक नेतृत्व छवि का अहम स्तंभ रहा है। अमेरिका जैसे बड़े अर्थतंत्र की वापसी भारत के लिए कूटनीतिक झटका है जिससे मंच की राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है।
अमेरिकी भागीदारी कम होने से सौर परियोजनाओं के लिए बहुपक्षीय वित्त और निजी निवेश पर असर पड़ने की आशंका है।
जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक सहमति बनाने में भारत को अतिरिक्त कूटनीतिक प्रयास करने पड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि ISA के 100+ देश सदस्य हैं और भारत-फ्रांस नेतृत्व जारी रहेगा, लेकिन अमेरिका का अलग होना वैश्विक संदेश के स्तर पर नकारात्मक संकेत देता है। इससे स्वच्छ ऊर्जा पर बहुपक्षीय सहयोग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
भारत के लिए आगे की रणनीति में यूरोप, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना और वैकल्पिक फंडिंग तंत्र मजबूत करना अहम होगा, ताकि अमेरिकी कदम से पैदा हुई रिक्तता को भरा जा सके।
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