
पाकिस्तान ने एक निर्वासन अभियान के तहत 17 लाख अफगान शरर्णाथियों सहित लाखों प्रवासी लोगों को देश छोड़ने का आदेश दिया है । इसके तह कई लोग पाकिस्तान छोड़ कर जा चुके हैं जबकि कइयों को जबरन जलील करके खदेड़ा जा रहा है। इस निर्वासन में सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों को जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है जिसको लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चिंता जताई है।
इन जोखिमों को देखते हुए तीन संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने शुक्रवार को सभी बच्चों और परिवारों की सुरक्षा का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान में घूमने, हिरासत केंद्रों में रहने, सीमा पार करने और अफगानिस्तान लौटने पर बच्चों को गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता है। यूएनएचसीआर, आईओएम और यूनिसेफ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान में विस्थापित बच्चों, परिवारों और शरणार्थियों के लिए समर्थन बढ़ाने का आह्वान किया है।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यूएनएचसीआर और आईओएम ने देश के भीतर चल रही सुरक्षा की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के पंजीकरण, प्रबंधन और स्क्रीनिंग के लिए एक तंत्र विकसित करने में पाकिस्तान की सहायता करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 30 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है, जिनमें से 3.3 मिलियन लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हैं। बता दें कि अफगानिस्तान जो वर्तमान में पहले ही मानवीय संकट से जूझ रहा है, में अफगानों के लौटने यह संकट और गंभीर होने का खतरा मंडरा रहा है।
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