
क्या अमेरिका ने भारत के पड़ोस में ईसाई देश बनाने के अपने कथित मंसूबे पर काम करना शुरू कर दिया है। ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने सात विदेशियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों में छह यूक्रेन के ड्रोन एक्सपर्ट और एक अमेरिकी नागरिक है। इन सभी पर मिजोरम में अवैध रूप से प्रवेश करने और फिर म्यांमार की सीमा में दाखिल होने का आरोप है। सभी आरोपियों को 27 मार्च तक पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। इन गिरफ्तारियों के साथ बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की चेतावनी फिर से सामने आ गई है, जिसमें भारत के पूर्व में ईसाई देश बनाने के प्लान के बारे में आगाह किया गया था।
शेख हसीना ने पहली ही दी थी चेतावनी – करीब दो साल पहले शेख हसीना जब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थी, तब उन्होंने कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर से सटे क्षेत्र में अमेरिका एक ईसाई देश बनाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि एक वॉइट अमेरिकन ने उनसे इस सिलसिले में मुलाकात की थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। हसीना ने यहां तक कहा कि उन्हें भरोसा दिया गया कि अगर वह प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती हैं तो उनकी सत्ता को कोई खतरा नहीं रहेगा।
शेख हसीना ने बताया था कि ईसाई देश के लिए म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ इलाकों के साथ ही भारत का भी हिस्सा शामिल करने की योजना प्रस्तावित थी। इसमें मणिपुर भी शामिल था। इस दावे के कुछ महीनों बाद ही एक छात्र विद्रोह ने शेख हसीना को बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल कर दिया और उन्हें देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी
यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिक क्या कर रहे थे? – अमेरिका और यूक्रेन के नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। वे बिना सरकार की मंजूरी के मणिपुर में घुसे।
उन्होंने म्यांमार और भारत के अलगाववादी गुटों से संपर्क साधा। हथियारबंद गुटों को ड्रोन के पुर्जे, बैटरियां और ट्रेनिंग दी।
उन्हें 16 मार्च को कोर्ट में पेश किया गया, जहां 11 दिनों की रिमांड पर भेजा गया है। इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है।
ईसाई देश बनाने के अमेरिकी एजेंडे का हिस्सा? – रक्षा विश्लेषक और रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन उत्तम कुमार देवनाथ ने स्पुतनिक इंडिया को बताया कि ईसाई देश बनाने का मकसद चीन के खिलाफ पश्चिमी देशों के लिए एक लॉन्चपैड तैयार करना था। कहा जाता है कि उस समय भारत, म्यांमार और शेख हसीना की तत्कालीन बांग्लादेश सरकार की तेजी से की गई कार्रवाई ने इस साजिश को नाकाम कर दिया। देवनाथ ने यूक्रेनियों की गिरफ्तारी को हैरान करने वाला बताया है और कहा कि इसका असली मकसद पूर्वोत्तर भारत में विद्रोह को बढ़ावा देना हो सकता है।
अमेरिकी प्लान पर बोले रक्षा एक्सपर्ट – भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी देवनाथ ने जोर देकर कहा कि अमेरिका की नजर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर रही है, ताकि ईस्ट तिमोर की तरह इस इलाके में एक ईसाई राज्य बना जा सके। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से मुमकिन है कि गिरफ्तार यूक्रेनियों और अमेरिकी नागरिक का समूह उसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो भारत के पूर्वोत्तर हिस्से और पड़ोसी बांग्लादेश व म्यांमार के कुछ इलाकों को काटकर एक ईसाई राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। देवनाथ ने कहा कि हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिक के तार खुफिया एजेंसी CIA से जुड़े हो सकते हैं।
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