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अमिताभ बच्‍चन को क्‍या हुआ? 83 की उम्र में ‘अंतिम सत्‍य’ की च‍िंता, कहा- मन के भीतर कितनी बातें चल रहीं


भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्‍चन इन दिनों अपने ब्‍लॉग पर काफी कुछ बयान कर रहे हैं। 83 साल के मेगास्‍टार ने बीते दिनों जहां घर पर बैठने और रूटीन लाइफ में काम के नहीं होने पर ‘खालीपन’ और ‘बेचैनी’ की बात की थी, वहीं अब उन्‍होंने ‘मन के भीतर चल रही कितनी ही बातों’ का जिक्र किया है। उन्‍होंने बताया कि एक ‘शांत और चिंतन भरा दिन’ बिताने के दौरान उन्‍होंने जिंदगी की अनिश्चितताओं और जीवन के अर्थ की निरंतर खोज पर विचार किया। वह लिखते हैं कि वह जवाबों की तलाश कर रहे हैं, कुछ जवाब मिले भी, लेकिन ज्यादातर अनसुलझे और अस्‍पष्‍ट रह गए हैं।
‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 17 में से 16 सीजन होस्‍ट कर चुके बिग बी ने अपने नए ब्लॉग में लिखा, ‘एक शांत और चिंतन भरा दिन… खुद के साथ, अपने आस-पास के माहौल के साथ और अपनी परिस्थितियों के साथ… मन के भीतर कितने ही विचार और बातें चल रही हैं, खुद से ही बातें कर रहा हूं… जवाबों की तलाश में… कुछ जवाब मिल भी रहे हैं, लेकिन ज्यादातर तो कोई जवाब नहीं मिल रहा या फिर जो मिल रहे हैं, वे भी अस्पष्ट हैं।’
कितने ही लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी यह पता लगाने में बिता दी कि क्यों और कैसे… लेकिन वे भी कुछ ऐसे शब्दों पर आकर रुक जाते हैं, जो शायद उस विचार का विश्लेषण तो करते हैं, लेकिन कभी भी कोई पक्का और अंतिम जवाब नहीं दे पाते
अमिताभ बोले- हर दिन, पल की शांति में, दुनिया का अजूबा – नितेश तिवारी के ‘रामायणम्’ में जटायू का किरदार निभा रहे अमिताभ बच्‍चन आगे लिखते हैं, ‘हर दिन, पल की शांति में, दुनिया का अजूबा, ‘क्यों, क्या और कहां’ का अजूबा… लेकिन जो जवाब मिलते हैं, उन पर कभी भी पूरी तरह भरोसा नहीं हो पाता… कितने ही लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी यह पता लगाने में बिता दी कि ‘क्यों’ और ‘कैसे’… लेकिन वे भी कुछ ऐसे शब्दों पर आकर रुक जाते हैं, जो शायद उस विचार का विश्लेषण तो करते हैं, लेकिन कभी भी कोई पक्का और अंतिम जवाब नहीं दे पाते।”
संक्षेप में कहें तो, बस एक ही और एकमात्र अंतिम सत्य है… आप खाली हाथ आए थे… और वैसे ही खाली हाथ वापस जाएंगे। अम‍िताभ बच्‍चन, एक्‍टर
‘आप खाली हाथ आए थे… और वैसे ही जाएंगे’ – वह आगे कहते हैं, ‘यह सच है… क्योंकि अगर जवाब बिना किसी सवाल के मिल जाता, तो वह जवाब कहलाता ही नहीं… वह तो उस विचार का अंतिम सत्य होता जिसने आपको सोचने पर मजबूर किया… संक्षेप में कहें तो, बस एक ही और एकमात्र अंतिम सत्य है… आप खाली हाथ आए थे… और वैसे ही खाली हाथ वापस जाएंगे।’