
टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत के खाते में ऐतिहासिक सात पदक गए लेकिन पिछले कुछ दिनों में तीन बार वो लम्हें भी आए जब कांस्य पदक हाथ से फिसल गया। महिला गोल्फ मुकाबले में भारत की गोल्फर अदिति अशोक आखिरी दौर में काफी समय तक दूसरे स्थान पर चल रही थी लेकिन आखिरी लम्हों में एक चूक ने उन्हें चौथे स्थान पर धकेल दिया और वो कांस्य पदक से चूक गईं। इसके बाद पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम को आखिरी क्वार्टर में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ मुश्किलों का सामना करना पड़ा और कांस्य पदक मैच में सिर्फ एक गोल के अंतर से ग्रेट ब्रिटेन के हाथों हार का सामना करना पड़ा और महिला टीम को चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। वहीं फ्रीस्टाइल कुश्ती के 86 किलोग्राम भार-वर्ग में कांस्य पदक मुकाबले के लिए लड़े दीपक पूनिया ने आखिरी मिनट में अंक गंवाते हुए पदक भी गंवा दिया। दीपक के खिलाफ आखिरी मिनट में विरोधी पहलवान अंक हासिल करने में कामयाबी मिली और वो कांस्य पदक नहीं जीत पाए।
ओलंपिक के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो ये पहला मौका नहीं है जब भारतीय खिलाड़ियों के हाथ से कांस्य पदक फिसला है। इसके पहले 1960 में रोम ओलंपिक में पुरुषों की 400 मीटर रेस के फाइनल में मिल्खा सिंह के खाते में नहीं जा पाया था। उन्होंने रेस खत्म होने से कुछ सैकंड पहले तीन खिलाड़ी उनके आगे निकल गए और मिल्खा सिंह .01 सैकंड से कांस्य पदक चूक गए। इसके बाद 1984 लास एंजेलिस ओलंपिक में महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स के फाइनल में भारत की उड़न परी पीटी ऊषा के हाथ से पदक फिसल गया। फाइनल में पीटी ऊषा ने 55.42 सैकंड के समय लिया लेकिन सैकंड के 100वें हिस्से से हार का सामना करते हुए पदक से चूक गई थी। वहीं एथेंस 2004 ओलंपिक खेलों में महिला लांग जंप में अंजू बॉबी जॉर्ज पांचवें स्थान पर रही थी। एथेंस में उन्होंने 6.83 मीटर लंबी दूरी तक जंप की थी। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2003 में भारत का इकलौता पदक अंजू के नाम ही है उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था। 1980 के मास्को ओलंपिक खेलों में भी महिला हॉकी टीम चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा था।
यही नहीं 2016 में हुए रियो ओलंपिक खेलों में महिला जिमनास्टिक मुकाबले में दीपा कर्माकर ने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें चौथा स्थान मिला। ऐस ही कुछ शूटर अभिनव बिंद्रा के साथ हुआ था। हमेशा अचूक निशाना लगाने वाले अभिनव को भी अपने मुकाबले में बहुत मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूकना पड़ा। जबकि मिक्स्ड डबल्स टेनिस में सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी भी चौथे स्थान पर रही और कांस्य पदक से दूर रह गई।
उम्मीद यही की जा रही है कि टोक्यो 2020 में सात पदक जीतने वाला भारतीय दल, पेरिस 2024 में पदकों की संख्या में और इजाफा करेगा।
लेख : विवेक शर्मा
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