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नवजात शिशुओं को डकार दिलाना क्यों है जरूरी? जानिए सही पोजिशन और अन्य अहम ड‍िटेल्‍स


नवजात शिशुओं को अक्सर ही गैस की समस्या हो जाती है, जिससे वे बेचैन हो सकते हैं। ऐसे में दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना या बर्पिंग करवाना काफी मददगार साबित होता है। इसके लिए पेरेंट्स तीन तरीके अपना सकते हैं, जिनमें बच्चे को कंधे पर लेकर, गोद में पकड़कर या गोद में बैठाकर उसकी पीठ को हल्के-हल्के थपथपाना शामिल है।
इन सभी तरीकों के बारे में लेख में आगे विस्तार से जानकारी दी गई है। साथ ही, यह भी बताया गया है कि शिशुओं को डकार दिलाने का सही समय क्या होता है।
श‍िशुओं को डकार दिलाना इसील‍िए जरूरी है – यूनिसेफ के अनुसार, शिशु को डकार दिलाना उसके आहार का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। दरअसल, जब शिशु कुछ निगलता है, तो उसके पेट में हवा के बुलबुले फंस सकते हैं, जिससे उसे असुविधा हो सकती है। डकार दिलाने से पेट से गैस निकल जाती है, पेट का दर्द कम होता है और उल्टी होने की संभावना भी घटती है।
एनएचएसयूके की रिपोर्ट में बताया गया है कि नवजात शिशुओं को डकार दिलाने के लिए कोई निश्चित नियम नहीं है। कुछ शिशुओं को दूध पिलाते समय ही डकार की जरूरत होती है, जबकि कुछ को बाद में। जरूरी यह है कि माता-पिता कुछ संकेतों पर ध्यान दें।
उदाहरण के लिए, अगर दूध पीते समय आपका शिशु असुविधा महसूस कर रहा है, तो बीच में ही उसे डकार दिला दें। वहीं, अगर बेबी ठीक लग रहा है और आराम से दूध पी रहा है, तो दूध खत्म होने तक इंतजार करें। कुल मिलाकर, यह आपके बच्चे की स्थिति देखकर ही तय किया जा सकता है।
न्‍यू बॉर्न बेबी को डकार दिलाने के ल‍िए ये तरीके कर सकते हैं ट्राई – यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, बेबी को डकार दिलाने के तीन तरीके बताए गए हैं, जि‍नकारी जानकारी नीचे दी जा रही है। इन्हें अपनाकर आप अपने शिशु को आसानी से डकार दिला सकती हैं।
1- गोद पर ल‍िटाएं और फ‍िर पीठ थपपाएं – पेरेंट्स या परिवार के अन्य सदस्य, जो भी बच्चे की देखभाल कर रहे हैं, शिशु को अपनी गोद में पेट के बल लिटा दें। बच्चे की ठुड्डी को सहारा देते हुए (गले पर कोई दबाव न डालें), अपने दूसरे हाथ से धीरे-धीरे उसकी पीठ को सहलाएं या थपथपाएं।
2- गोद पर बैठाएं और फ‍िर हथेली से पीठ सहलाएं – अपने शिशु को अपनी गोद में इस प्रकार बिठाएं कि उसका चेहरा आपसे दूर की ओर हो। अपनी हथेली को शिशु की छाती पर सपाट रखें और उसकी ठुड्डी और जबड़े को सहारा दें (गले पर दबाव न डालें)। शिशु को थोड़ा आगे की ओर झुकाएं और अपने दूसरे हाथ से उसकी पीठ को धीरे से सहलाएं या थपथपाएं।
3-बच्चे को अपने कंधे पर रखकर डकार दिलाने की कोशिश करें – शिशु को अपनी छाती से लगाएं और उसकी ठुड्डी को अपने कंधे पर टिकाएं। एक हाथ से शिशु के सिर और कंधे को सहारा दें और धीरे-धीरे उसकी पीठ थपथपाएं। इस दौरान हल्का घूमना-फिरना भी फायदेमंद हो सकता है। हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि थपकियां हल्की हों और बच्चे की गर्दन और सिर सुरक्षित रहें।
हमेशा साफ कपड़ा अपने साथ रखें – डकार लेते समय बेबी थोड़ा दूध बाहर निकाल सकता है, इसलिए डकार पोंछने के लिए हमेशा एक साफ कपड़ा या मलमल का टुकड़ा तैयार रखें। यह पूरी तरह सामान्य है और इसकी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।
तब भी गैस के लक्षण द‍िखें तो आजमा सकते हैं ये 1 तकनीक – पेरेंट्स एक बात पर गौर करें क‍ि अगर ऊपर बताए गए तरीकों से आपका बच्चा बर्प नहीं कर पा रहा है और उसे गैस के लक्षण दिख रहे हैं (जैसे ज्यादा रोना, पीठ को मोड़ना, पैरों को पेट से सटाना या मुट्ठियां बांधना), तो परेशान न हों, बल्‍क‍ि नीचे द‍िया गए एक उपाय अपना सकते हैं।
माता-प‍िता सबसे पहले बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और उसके पेट की धीरे-धीरे मालिश करें। साथ ही, बच्चे के पैरों को आगे-पीछे हिलाएं, जैसे वह साइकिल चला रहा हो।
तब डॉक्‍टर से जरूर करें संपर्क – अगर यह सभी उपाय करके भी आराम न म‍िले, तो फ‍िर ऐसी कंडीशन में अपने डॉक्‍टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। वे ही आपको सबसे सही और सुरक्षित उपाय बता पाएंगे।
ब्रेस्‍टफीड कराते वक्‍त जरूर बरतें सावधानी – यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, शिशु को स्तनपान कराते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। नीचे ऐसी ही कुछ अहम बातों की जानकारी दी जा रही है, जिनका पालन मदर्स को को स्तनपान कराते समय जरूर करना चाहिए।
सबसे पहले बच्चे की नाक को अपने निप्पल के ठीक सामने रखें। इससे बच्चा सही पोजि‍शन में आ पाता है।इसके बाद बच्चे के सिर को हल्का सा पीछे की ओर झुकाएं, ताकि उसका ऊपरी होंठ आपके निप्पल को छू सके। ऐसा होने पर बच्चा खुद ही अपना मुंह खोल देता है। जब बच्चे का मुंह पूरी तरह खुल जाए, तब उसके सिर को थोड़ा पीछे और ठुड्डी को आगे रखते हुए उसे स्तन की ओर लाएं।
इस तरह ब्रेस्‍ट बच्चे के मुंह में गहराई तक चला जाता है और निप्पल उसके मुंह के कोमल हिस्से तक पहुंच पाता है। साथ ही, इससे मां को दर्द नहीं होता और बच्चे को भी जरूरत के अनुसार भरपूर दूध मिल पाता है।