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फ्लाइट में इसलिए नहीं करनी चाहिए किसी के साथ सीट में अदला-बदली, एयर होस्टेस भी पूछने पर कर देती हैं साफ मना

फ्लाइट में सीट रिजर्व हम अपनी मर्जी से करते हैं, लेकिन असलियत बैठने के बाद पता चलती है कि वो सीट आपके लिए सही है या नहीं, क्योंकि कभी-कभी आपके साथ ऐसे लोग बैठ जाते हैं, जिनकी वजह से पूरा सफर अजीब हो जाता है। यही नहीं कभी-कभी हमें विंडो सीट चाहिए होती है, ऐसे में हमारे पास या तो किसी के साथ बदलने का ऑप्शन होता है या फिर जिस सीट पर हैं उसी पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
अगर हम बात करें सीट बदलने की तो इसके लिए भी काफी हिम्मत जुटानी पड़ती है, क्या पता कोई अपनी सीट ऑफर करे या न करे! खैर, क्या आप ये बात जानते हैं कि फ्लाइट में अक्सर आपको सीट नहीं बदलनी चाहिए, ये चीज वहां मौजूद एयर होस्टेस भी मना करती हैं। आप भी सोच रहे होंगे ऐसा क्यों, तो चलिए इस सवाल का जवाब हम आपको देते हैं।
फ्लाइट अटेंडेंट का क्या है कहना – फ्लाइट की एयर हॉस्टेस का कहना है कि सीट बदलने से जुड़े कई अहम फैक्टर्स हैं, जैसे कई बार आप अपनी सुख-सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पहले से ही सीट बुक कर लेते हैं। अगर आप किसी से सीट बदलते हैं, तो हो सकता है शायद अदला-बदली से आपको वो कम्फर्ट न मिल पाए।
खाना सर्व करने की दिक्कत – खाने की प्री बुकिंग के लिए भी सीट नंबर दिए जाते हैं, लेकिन अगर आप सीट बदलते हैं तो शायद आपके खाने की भी अदला-बदली हो सकती है। सीट बदलने से कभी-कभार केबिन क्रू भी खाना सर्व करने की गारंटी नहीं लेते। यही नहीं, एक अच्छे स्पेस के साथ बैठने के लिए आपने महंगी टिकट पर पैसे खर्च किए होते हैं, ऐसे में सीट की अदला-बदली से आपके पैसे भी बर्बाद हो जाते हैं और कम्फर्ट भी चला जाता है।
फ्लाइट में सीट बदलने से बैलेंस हो सकता है खराब – इस बात का ध्यान रखें कि उड़ान भरने से ठीक पहले सीट नहीं बदलनी चाहिए, क्योंकि वजन और बैलेंस की कैलकुलेशन आपके द्वारा निर्धारित सीट पर बैठकर की जाती है। एलिवेटर ट्रिम उसी के अनुसार सेट किया जाता है। अगर एक व्यक्ति सीट बदलता है, तो इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर एक पूरा ग्रुप सीट में अदला-बदली करता है, तो प्लेन ट्रिम से आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगा, और परिणामस्वरुप प्लेन इससे क्रैश भी हो सकता है। इसलिए, सीट बदलने से पहले सीट बेल्ट लाइट बंद होने तक प्रतीक्षा करें।
प्लेन दुर्घटना के बाद बॉडी पहचानने में होती है दिक्कत – ये जाहिर सी बात है, अगर प्लेन क्रैश होता है या किसी भी तरह की दुर्घटना होती है, तो सीट बदलने से बॉडी की पहचान कर पाना किसी के लिए भी मुश्किल हो सकता है। साथ ही कभी-कभी कई परिस्थितियों में पुलिस अपनी जानकारी के लिए प्लेन में कुछ लोगों से पूछताछ करती है, सीट बदलने से उनके लिए सही जानकारी हासिल करने में मुश्किल हो सकती है।