
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आईलैंड पर हमला किया है। इस हमले के साथ ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के द्वीपों पर कब्जा करने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप ने एक दिन पहले ही 2500 मरीन सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने का आदेश दिया है। अमेरिकी नेवी के पूर्व अधिकारी और रक्षा एक्सपर्ट मैल्कम नैंस ने इसे एक खतरनाक प्लान बताते हुए आकलन पेश किया है।
अमेरिका ने 40 साल पहले बनाया था प्लान – मैल्कम नैंस ने कहा कि यह काम कम से कम दो हफ्तों में पूरा हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी समस्या भी बताई। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के अमेरिकी कमांडरों ने 40 साल पहले ही इस योजना का विश्लेषण किया था। मैल्कम ने बताया कि उस समय अनुमान लगाया गया था कि हमें 6000 मरीन सैनिकों के साथ-साथ कई द्वीपों पर तैनात सभी उपकरणों की आवश्यकता होगी।
मैल्कम ने बताया कि योजना यह थी कि पहले लारक, होर्मुज और केशम द्वीप पर कब्जा करके बंदर अब्बास को घेर लिया जाए। फिर प्रतिबंधित समुद्री सीमा को तोड़कर आगे बढ़ा जाए। इसके बाद प्रतिबंधित समुद्री सीमा को तोड़कर आगे बढ़ा जाए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 1988 में भी इस तरह का प्लान नहीं बनाया था, जब ईरानी बारूदी सुरंगों ने अमेरिकी जहाजों को डुबोने की कोशिश की थी। उन्होंने इसकी वजह भी बताई।
अमेरिका के लिए खतरनाक है होर्मुज स्ट्रेट – मैल्कम ने बताया कि इसके लिए अमेरिका ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में हमला करना होगा। इसके जवाब में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड और बासिज फोर्स के सैनिक पहाड़ों से इन द्वीपों पर बमबारी और आत्मघात हमला करेंगे।
उन्होंने रसद सप्लाई से जुड़ी समस्या पर ध्यान दिलाया। मैल्कम ने कहा कि यह सप्लाई UAE और कतर के ठिकानों से होगी, जिन पर फिर से हमला होगा। वे शायद इसके लिए सहमत न हों।
इसका मतलब होगा कि सप्लाई को एक बेहद विवादित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना होगा। उन्होंने इसे पागलपन बताया।
मिडिल ईस्ट में तैनात सेना को ईरानी पहाड़ों के सामने मिसाइलों, पनडुब्बी ड्रोन, सुसाइड बोट या बारूदी सुरंगों के बीच लॉन्च करना होगा, जिनका अमेरिका ने पता नहीं लगाया है।
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की बारूदी सुरंगें
हाल में में पता चला है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछा रहा है। मैल्कम ने कहा कि अगर पेंटागल इटली से एक्सपेडिशनरी सी बेस जहाज को हिंद महासागर में लाता है तो होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित मंच मिल सकता है। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने इसे मूर्खतापूर्ण अवधारणा बताया जो जल्दबाजी में की मालूम पड़ती है।
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