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साइकोलॉजिस्‍ट की इस ट्रिक से पैरेंट्स बन पाएंगे बच्‍चे के बेस्‍ट फ्रेंड, सिर्फ 5 सेकंड का लगता है वक्‍त

पैरेंटिंग एक ऐसी चीज है जिसमें मां-बाप को हर दिन एक नई चुनौती का सामना करना पड़ता है। कई बार तो उन्‍हें समझ ही नहीं आ पाता है कि उन्‍हें क्‍या करना है और किसी स्थिति या फेज को किस तरह से हैंडल करना है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो इसे लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, ऐसा होना एकदम नॉर्मल है और एक बेहतर पैरेंट बनने की कोशिश करना ही आपके बच्‍चे के लिए काफी है।
मैनहट्टन स्थित क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और तीन बच्चों की मां डॉ. बेकी कैनेडी के इंस्टाग्राम हैंडल पर 1.7 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। वो यहां पर प्रभावी पैरेंटिंग ट्रिक्स और टिप्स साझा करती हैं। हाल ही में, डॉ. कैनेडी ने एक पैरेंटिंग टिप साझा की, जिसके बारे में उनका कहना है कि इसे करने में केवल पांच सेकंड लगते हैं, और फिर भी यह बहुत काम ही है।
क्‍या करना है – कैनेडी बच्‍चे से यह कहने की सलाह देती हैं कि ‘बच्‍चा होना काफी मुश्किल हो सकता है, है ना?’ कैनेडी कहती हैं कि सहानुभूति और समझ से भरे वाक्‍य कहने से बच्‍चे को यह महसूस करने में मदद मिल सकती है कि उसके मां-बाप उसके पहलू को देख सकते हैं। अक्‍सर मुश्किल परिस्थित‍ि में पैरेंट्स इस बात पर ध्‍यान देना भूल जाते हैं कि उनके बच्‍चे को भी परेशानी हो रही है। एक-दूसरे को समझने से किसी भी मुश्किल का हल निकाला जा सकता है।
ये कैसे काम करता है – वीडियो में कैनेडी कहती हैं कि इससे बच्‍चे को लगेगा कि उसे भी सुना और देखा जा रहा है और इससे अपने आप ही बच्‍चे के बिहेवियर में सुधार आ सकता है। टॉडलर बच्‍चा टैंट्रम दिखाए या फिर टीनएज बच्‍चा, सही तरीके से उसका रिस्‍पॉन्‍स करने से आपको उसके टैंट्रम को रोकने में मदद मिल सकती है। डॉक्‍टर कैनेडी ने कहा कि आप बच्‍चों से ये कह सकते हैं ‘तुम जो वास्‍तव में चाहते हो, मुझे वो मिल गया है।’
बच्‍चे को और क्‍या कह सकते हैं – कुछ बच्‍चे चीजों को गहराई से महसूस करते हैं और बाकी बच्‍चों की तुलना में उन चीजों को अपने दिल से लगा सकते हैं। इस स्थिति में डॉक्‍टर कैनेडी ने अपनी एक अलग पोस्‍ट में कुछ टिप्‍स दिए हैं। उनका कहना है कि फीलिंग्‍स से उलझन हो सकती है। इनके बारे में बात करना काफी ट्रिकी होता है। ऐसे में आप बच्‍चे से कहें कि तुम्‍हारी फीलिंग के बारे में बात करने में मुझे डर नहीं लगता है और इसीलिए मैं यहां तुम्‍हारे पास हूं।
हर बच्‍चे के लिए नहीं करता काम – हर बच्‍चा एक जैसा नहीं होता है और हो सकता है कि जो एक बच्‍चे पर फिट बैठे, वो दूसरे पर ना जमे। हर बच्‍चे का अलग मूड और टेंपरमेंट होता है। इसलिए हो सकता है कि सारे टिप्‍स हर बच्‍चे पर काम ना करें लेकिन आपको हमेशा कोशिश करते रहना है और देखना है कि कौन-सी अप्रोच आपके बच्‍चे पर फिट बैठती है।