
सोमवार की सुबह भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक जीत की खुशी लेकर आई है। कतर ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को रिहा कर दिया है। इन लोगों को कथित जासूसी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में भारत के हस्तक्षेप के बाद जेल में बदल दिया गया था। पीएम मोदी ने यूएई में कतर के अमीर से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की मुलाकात का ही असर है कि सभी आठ लोगों को रिहा कर दिया गया। भारत लौटे ये अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं। भारत लौटे नेवी के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बिना यह संभव नहीं था। उन्होंने भारत सरकार के अथक प्रयासों की सराहना की।
कतर में मौत की सजा का सामना कर आठ में से सात भारतीय सोमवार को वापस लौट आए। उनकी रिहाई पीएम मोदी के नेतृत्व में गहन बातचीत का प्रतीक है। भारत लौटने के बाद इन लोगों ने बिना संकोच अपनी खुशी जाहिर की। दिल्ली पहुंचने पर इनमें से एक अधिकारी ने कहा, ‘मैं पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं, क्योंकि अगर उन्होंने हस्तक्षेप न किया होता तो हमारी रिहाई न होती। बिना उनके हस्तक्षेप के कुछ नहीं हुआ। आज हम आपके सामने खड़े नहीं होते। अगर इतने बड़े लेवल से हस्तक्षेप न होता।’
इस मीटिंग ने कराई रिहाई? – पिछले साल 1 दिसंबर को पीएम मोदी और कतर के अमीर तमीम बिन हमद के बीच बैठक हुई थी। माना जा रहा है कि इस मीटिंग ने ही 8 भारतीयों के रिहाई का रास्ता तय कर दिया था। इनकी रिहाई के लिए आधिकारिक और बैक चैनल दोनों ही तरह की बातचीत का इस्तेमाल किया गया। पीएम मोदी ने इस मीटिंग के बाद कहा था, ‘द्विपक्षीय साझेदारी की संभावना और कतर में भारतीय समुदाय की भलाई पर हमारी अच्छी बातचीत हुई।’ इस बातचीत में 8 भारतीयों की रिहाई का मुद्दा था या नहीं इसके बारे में दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website