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6 फैक्टर्स और 17 साल का इंतजार, RCB ने कैसी पलटी किस्मत, इन वजहों से कर पाई प्लेऑफ में क्वालीफाई


रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अपने टॉप ऑर्डर की शानदार बल्लेबाजी के बाद आखिरी ओवर में यश दयाल की गेंदबाजी से 18 मई की रात आईपीएल के रोमांचक मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को 27 रन से हराकर प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने वाली चौथी और आखिरी टीम बनी। कोलकाता नाइटराइडर्स, राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद पहले ही प्लेऑफ में जगह पक्की कर चुकी हैं।
कई साल पहले, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपने फैंस को उम्मीद जगाई थी कि उनकी टीम इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब जीतेगी। तब एक नारा निकला, ‘ई साला कप नामदे!’ कन्नड़ में जिसका मतलब होता है कप इस बार हमारा है। हालांकि, ट्रॉफी का इंतजार 17 सीजन से जारी है टीम की इस कैचलाइन का भी काफी मजाक उड़ चुका है। ​इस सीजन में आरसीबी ने अपने नाम से बैंगलोर को बदलकर बेंगलुरु कर लिया और कैचलाइन को ‘होसा अध्याय’ (एक नई शुरुआत) में बदल दिया, लेकिन एक समय शुरुआती आठ मैच में सात हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर खड़ी आरसीबी ने ऐशा क्या किया कि उसके दिन बदल गए। चलिए उन फैक्टर्स के बारे में जानने की कोशिश करते हैं जिनके बूते रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने प्लेऑफ में जगह बनाई।
विराट कोहली ने पर्पल पैच हासिल किया है और सीजन के ज्यादातर हिस्से में ऑरेंज कैप उनके ही पास रही है। फिर भी, जब टीम की हालत खराब थी, तो उनका प्रदर्शन नहीं बल्कि उनका स्ट्राइक रेट चर्चा का विषय बना। विराट कोहली ने इस सीजन में 155.60 की स्ट्राइक रेट से एक शतक और पांच अर्धशतक के साथ 708 रन बनाए हैं। उम्मीद है कि नॉक आउट मुकाबलों में भी यही फॉर्म जारी रखे।
द फाफ फैक्टर – फाफ डुप्लेसिस आरसीबी डगआउट में बैठे उन चुनिंदा लोगों में से हैं, जो जानते हैं कि आईपीएल ट्रॉफी उठाना कैसा लगता है। उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के साथ दो बार ऐसा किया है। 38 वर्षीय खिलाड़ी दबाव झेलने और जरूरत पड़ने पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए एक या दो सबक दे सकता है। शनिवार की रात कोहली के आउट होने के बाद, नमी के कारण मुश्किल हो रहे विकेट पर, दक्षिण अफ्रीकी प्लेयर ने अपना सारा अनुभव निचोड़ते हुए 54 रन की पारी निर्णायक पारी खेली।
पाटीदार का जोरदार प्रहार – एक स्पष्ट और सुसंगत भूमिका सौंपे जाने के बाद रजत पाटीदार ने बताया कि उस पर अमल कैसे करना होता है। पांच अर्धशतक और 180 के स्ट्राइक रेट के साथ, पाटीदार ने विराट कोहली के बाद टीम में दूसरे स्टार भारतीय बल्लेबाज की कमी पूरी कर दी। उन्होंने लगातार तेज गति से रन बनाए और उनकी सबसे बड़ी खासियत लंबे छक्के मारने की क्षमता रही।
खिलकर आया विदेशी फ्लेवर – बल्ले से ठंडे ग्लेन मैक्सवेल और रेसी टॉपले-विल जैक, कैमरून ग्रीन का खराब फॉर्म आरसीबी के लिए बड़ी चिंता का विषय था। लेकिन सीजन के दूसरे भाग में विल जैक्स के बल्ले ने रन उगलना शुरू कर दिया। उन्होंने जबरदस्त कुटाई की। एक शतक भी जमाया। कैमरन ग्रीन ने एक ऑलराउंडर की भूमिका निभाई, जिसने टीम के विदेशी खिलाड़ियों को इंस्पायर किया