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प्रसव के दौरान भारत में होने वाले मातृ मृत्यु दर में 80% की गिरावट, रिपोर्ट का दावा


भारत में ‘मातृ मृत्यु दर’ में पिछले दशकों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन 2015 के बाद सुधार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। 2023 में वैश्विक स्तर पर 2.4 लाख मातृ मौतों में से लगभग 24,700 भारत में हुईं, जिससे भारत सबसे ज्यादा ‘मातृ मृत्यु’ वाले देशों में बना हुआ है।
हालांकि ‘मातृ मृत्यु अनुपात’ (MMR) घटकर 116 तक आ गया है, फिर भी राज्यों के बीच असमानता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और समय पर इलाज की कमी बड़ी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन कमियों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो 2030 तक सुरक्षित मातृत्व का लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है।
‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब भी उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा मातृ मृत्यु होती है। 2023 में दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव से जुड़े कारणों से लगभग 2.4 लाख महिलाओं की मौत हुई, जिनमें से करीब 24,700 मौतें भारत में दर्ज की गईं। इस सूची में नाइजीरिया, पाकिस्तान और इथियोपिया जैसे देश भी शामिल हैं।
हालांकि, दीर्घकालिक आंकड़े बताते हैं कि भारत ने मातृ मृत्यु दर कम करने की बेहतर कोशिश की गई है।
1990 में जहां यह संख्या लगभग 1.19 लाख थी, वहीं 2015 में घटकर 36,900 और 2023 में 24,700 रह गई।
इसी तरह मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) भी 1990 के 508 से घटकर 2023 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 116 हो गया है, जो सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट? – विशेषज्ञों के अनुसार, इस सुधार का मुख्य कारण सुरक्षित प्रसव में वृद्धि, प्रसव पूर्व देखभाल में सुधार और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम रहे हैं। फिर भी राज्यों के बीच असमानता बनी हुई है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।