
मेरे पास ऐसे कई मरीज आते हैं, जिनकी हथेली-तलवे, बगल आदि शारीरिक हिस्सों में जरूरत से ज्यादा पसीना आता है। दरअसल, यह स्थिति स्वेट ग्लैंड के ओवरएक्टिव होने के कारण होती है। ढीले-हल्के कपड़े पहनने, एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग, तनाव-डाइट को कंट्रोल करके इस कंडीशन को मैनेज किया जा सकता है। आमतौर पर यह स्थिति कोई खतरनाक जोखिम पैदा नहीं करती है, लेकिन व्यक्ति की असहजता, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक जीवन के प्रभावित होने के पीछे जिम्मेदार हो सकती है।
हाइपरहाइड्रोसिस: ज्यादा पसीना आने की बीमारी – पसीना आना शरीर की नॉर्मल फंक्शनिंग है। शरीर का तापमान बढ़ने पर पसीना निकलकर बॉडी को ठंडा रखने में मदद मिलती है। यह काम पूरे शरीर में मौजूद स्वेट ग्लैंड करती हैं। जब यही स्वेट ग्लैंड्स जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं तो व्यक्ति को सामान्य से काफी ज्यादा पसीना आने लगता है। कई बार गर्म मौसम या शारीरिक गतिविधि किए बिना भी ज्यादा पसीना आ सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस स्थिति के दो प्रकार होते हैं- प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस और सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस।
हाइपरहाइड्रोसिस क्यों होता है? –
आनुवांशिक कारण – कई मामलों में इस समस्या के पीछे पारिवारिक इतिहास भी होता है। अगर माता-पिता या खानदान में किसी को यह समस्या है तो बच्चे को इसके होने की संभावना अधिक रहती है।
हॉर्मोनल चेंज – थायरॉइड, मेनोपॉज या हॉर्मोनल असंतुलन की वजह से भी शरीर में पसीना अधिक आने लगता है। यह कारण महिलाओं में ज्यादा आम होता है।
तनाव और घबराहट – चिंता, घबराहट या तनाव होने पर शरीर का नर्वस सिस्टम अधिक एक्टिव हो जाता है, जिसकी वजह से पसीने का उत्पादन बढ़ जाता है।
कुछ बीमारियां – डायबिटीज, मोटापा, इंफेक्शन या कुछ न्यूरोलॉजिकल कंडीशन के मरीजों को भी अत्यधिक पसीना आने की आशंका ज्यादा रहती है।
कुछ मेडिसिन के साइड इफेक्ट – ज्यादा पसीना आने की समस्या कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के रूप में भी हो सकती है।
हाइपरहाइड्रोसिस को कैसे पहचानें? निम्नलिखित कुछ खासियतों से हाइपरहाइड्रोसिस को पहचाना जा सकता है –
हाथों की हथेली और पैरों के तलवों में बार-बार पसीना आना
अंडरआर्म्स और चेहरे पर ज्यादा पसीना आना
कपड़ों का पसीने से जल्दी भीग जाना
पसीने की वजह से स्किन में जलन या फंगल इंफेक्शन होना
सोशल या प्रोफेशनल हालात में असहज महसूस होना
डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी – हाइपरहाइड्रोसिस सिर्फ मौसम या गर्मी से जुड़ी दिक्कत नहीं है। कई बार हॉर्मोनल बदलाव, स्ट्रेस या अन्य मेडिकल कंडीशन भी इसके पीछे हो सकती हैं। इसलिए, अगर अत्यधिक पसीना आने की समस्या लंबे समय से परेशान कर रही है तो डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी हो जाता है। डॉक्टर इसके पीछे के संभावित कारणों को पता करके राहत दिला सकता है।
हाइपरहाइड्रोसिस को मैनेज करने का तरीका – कुछ आसान उपायों को आजमाकर ज्यादा पसीना आने की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल व मैनेज किया जा सकता है।
हल्के और ढीले कपड़े पहनें – प्रभावित व्यक्तियों को कॉटन जैसे हल्के और ढीले कपड़े पहनने चाहिए। इनमें पसीना कम महसूस होता है और यह जल्दी सूख भी जाते हैं।
एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करें – डॉक्टर से बात करके अपने लिए बढ़िया व सेफ एंटीपर्सपिरेंट या स्पेशल रोल-ऑन की जानकारी ले सकते हैं। इन्हें लगाने से पसीने का उत्पादन कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
बैलेंस्ड डाइट लें – बहुत ज्यादा मसाले वाला भोजन, कैफीन और ऐल्कोहॉल का सेवन करने से बचना चाहिए।
स्ट्रेस मैनेज करें – तनाव की स्थिति में भी ज्यादा पसीना आता है। स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए योग, मेडिटेशन और रेगुलर एक्सरसाइज की मदद लें।
हाइपरहाइड्रोसिस के इलाज के तरीके – अगर ऊपर बताए गए तरीकों से यह स्थिति मैनेज नहीं होती तो डॉक्टर कुछ मेडिकल ट्रीटमेंट की सलाह दे सकता है- जैसे
मेडिकेटेड एंटीपर्सपिरेंट
आयनटोफोरेसिस थेरेपी
बोटॉक्स इंजेक्शन
गंभीर केस में सर्जिकल ट्रीटमेंट – इस स्थिति की समय पर पहचान और इलाज करके हाइपरहाइड्रोसिस को अच्छी तरह से कंट्रोल किया जा सकता है और व्यक्ति नॉर्मल लाइफ जी सकता है।
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