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क्या होता है वॉर क्राइम? इसे मानने के लिए बाध्य क्यों हैं सभी देश, जानें


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि पूरे देश को एक ही रात में तबाह कर सकते हैं। ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें युद्ध अपराधों की कतई चिंता नहीं है। ऐसे में अब जिनीवा कन्वेंशन में हुए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून पर चर्चा शुरू हो गई। है। 1949 के जिनीवा कन्वेंशन इसके लिए एक 1 सुरक्षा कवच है। इसके पालन और निगरानी में इंटरनैशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) = की अहम भूमिका होती है।
जिनीवा कन्वेंशन का क्या है नियम – अगर कोई देश या उसकी सेना स्कूलों, अस्पतालों या रिहायशी इलाकों को निशाना बनाती है, जबकि वहां कोई सैन्य गतिविधि नहीं है, तो यह युद्ध अपराध होगा, चाहे युद्ध कितना भी गंभीर क्यों न हो। युद्धबंदियों को यातना नहीं दी जा सकती।
रासायनिक या जैविक हथियार का इस्तेमाल – जिनीवा कन्वेंशन के अनुसार, आत्मसमर्पण कर चुके या घायल सैनिकों को मारना, उन्हें यातना देना या अपमानित करना अपराध है। उन्हें भोजन, इलाज और सम्मानजनक बर्ताव देना अनिवार्य है। आम नागरिकों पर रासायनिक या जैविक हथियार का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
दायरे में यौन हिंसा भी – यौन हिंसा को भी युद्ध अपराधों में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों को नष्ट करना भी युद्ध अपराध है, जब तक कि उनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए न हो रहा हो।
युद्ध अपराध की सजा क्या है – युद्ध अपराध के लिए सजा बहुत कड़ी है, सुनवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होती है।
इस्राइल पर लगे आरोप – इजरायल के खिलाफ गाजा और वेस्ट बैक में नागरिकों पर सैन्य कार्रवाइयों के आरोप लगे।
नागरिक इलाकों, अस्पतालों और स्कूलों पर हमलों के दावे किए गए।
बुनियादी सुविधाओं (पानी, बिजली) का नष्ट करने की बातें कही गई।
इजरायल कहता है कि वह आत्मरक्षा में कार्रवाई करता है। नागरिकों को निशाना नही बनाता है।
अमेरिका पर आरोप – इराक युद्ध (2003) के दौरान नागरिकों की मौत।
अबू ग्रीब जेल कांड में कैदियों के साथ यातना और अपमान।
ड्रोन हमलों में आम नागरिकों के मारे जाने के आरोप।
अमेरिका ने कई मामलों में जांच की और कुछ सैनिकों को सजा भी दी है।
ईरान-अमेरिका के बीच हुआ सीजफायर –
ईरान के खिलाफ दावे – ईरान पर सीधे युद्ध अपराधों से ज्यादा ग्रुप्स समूहों (जैसे मिलिशिया) को समर्थन देने के आरोप लगते है।
ऐसे समूहों पर नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप है।
हमलों के जरिए नागरिक एरिया को नुकसान पहुंचाने के दावे हुए।
ईरान इन आरोपों को खारिज करता है।