
क्वींसलैंड के मैकेय में 28 फरवरी 1992 को भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए वनडे को क्रिकेट फैंस सबसे छोटे वनडे के तौर पर भी जानते हैं। इसी मैच में भारतीय टीम की ओर से किए दो परिवर्तन चर्चा का केंद्र रहे थे। पहला- अजय जडेजा का यह डेब्यू मैच था। दूसरा- कपिल देव ने इस मैच में ओपनिंग की थी। तीसरा- यह मैच सिर्फ दो गेंद तक ही चला था।
1992 विश्व कप का मैच था यह
क्वींसलैंड के जिस मैकेय मैदान पर यह क्रिकेट मैच खेला जाना था। वहां मैच से कुछ दिन पहले रिकॉर्ड 878 मिलीलीटर बारिश हुई थीं। इस कारण ऑस्ट्रेलिया की शूगर कैपिटल कहलाते मैकेय में बाढ़़ आ गई थी। पूरे स्टेडियम में कई दिन पानी भरा रहा था। विश्वकप के मैच शुरू होने पर स्टेडियम प्रबंधन ने आनन-फानन में पूरे स्टेडियम की साफ सफाई करवाई। जिस दिन मैच था उस दिन सुबह तक पिच गीली थी। मैदानी अंपायरों ने एस्पेक्शन कर दोपहर बाद मैच करवाने का फैसला लिया। लेकिन तब तक 50 ओवर के मैच को 20 ओवरों तक सिमेट दिया गया था।
श्रीलंका ने टॉस जीती और पहले गेंदबाजी चुन ली
क्योंकि बारिश के कारण पिच गिली थी ऐसे में श्रीलंका ने टॉस जीतते ही गेंदबाजी चुन ली। श्रीलंकाई कप्तान को भरोसा था कि पिच ड्राई होने के कारण उनके तेज गेंदबाजों को इसका भरपूर फायदा मिलेगा। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भी अपने एक फैसले के कारण क्रिकेट फैंस को चौंका दिया। यह पहला मैच था जिसमें भारतीय ऑलराउंडर कपिल देव ओपनिंग के लिए आए थे। कपिल का ओपनिंग पर साथ दिया था कृष्णामचारी श्रीकांत ने।
दो गेंद डालने के बाद ही शुरू हो गई बारिश
श्रीलंकाई कप्तान अरविंदा डी सिल्वा जीती टॉस का भरपूर फायदा उठाना चाहते थे इसमें उन्होंने गेंद अपने तेज गेंदबाज चंपका रामानायके के हाथ में थमा दी। स्ट्राइक एंड पर थे श्रीकांत। श्रीकांत ने पहली गेंद को रोक लिया तो दूसरी गेंद पर एक रन ले लिया। अब कपिल देव स्ट्राइक पर थे। लेकिन इसी बीच आसमान में फिर से बादल छा चुके थे। हलकी बारिश शुरू हो गए। सारे खिलाड़ी भागते हुए पैवेलियन पहुंच गए। इसके बारिश रुकी ही नहीं। मजबूरन अंपायर डेविड शेपहर्ड और इयॉन रॉबिनसन को मैच रद्द घोषित करना पड़ा।
इसलिए थी इस मैच की अहमियत
इस मैच को क्रिकेट इतिहास का सबसे छोटा मैच कहा जाता है। छोटा इसलिए क्योंकि इसमें टॉस के बाद दो गेंदें फेंकी जा चुकी थी। हालांकि इससे पहले भी दो मैच ऐसे हो चुके हैं जब टॉस होने के बावजूद मैच बारिश के कारण शुरू ही नहीं हो पाया। क्वींसलैंड के मैच को इसलिए मान्यता मिली क्योंकि यहां दो गेंदें फेंकी जा चुकी थीं। ऐसे मे ऑफिशियिल यह क्रिकेट इतिहास का सबसे छोटा मैच घोषित किया गया।
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