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अमेरिकी लड़ाकू विमान व मिसाइल चीन की दुर्लभ धातुओं के निशाने पर


दुलर्भ खनिज धातुओं के वैश्विक बाजार पर चीन की पकड़ मजबूत हो गई है और अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड वार के चलते ड्रेगन की अमेरिकी हथियारों को निशाना बनाने की क्षमता में वृद्दि हुई है। पेंटागन के वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि अमेरिकी लड़ाकू जेट व मिसाइल चीन की दुर्लभ धातुओं के निशाने पर आ गए हैं।इस धातु का इस्तेमाल अमेरिका के लड़ाकू विमान लॉकहीड मार्टिन कॉर्प के एफ -35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर जेट से लेकर गाइडेड मिसाइलों और लेजर तकनीक तक में किया जाता है।
बड़ी बात यह है कि चीन के पास इस धातु का वैश्विक उत्पादन 95% है और अमेरिका इस दुर्लभ खनिज जरूरतों के लिए 80% एशियाई राष्ट्रों पर निर्भर है।चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक अपने दुर्लभ व कीमती धातुओं व खनिजों के बल पर ही चीन अमेरिका के खिलाफ ट्रेड वार के लिए तैयार है। सोयाबीन, प्राकृतिक गैस और एल्युमीनियम सहित वस्तुओं पर जैसे को तैसे की टैरिफ नीति के कारण पहले ही वैश्विक बाजार को हिला कर रख दिया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा पैदा हो रहा है। बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस के प्रबंध निदेशक व शोधकर्ता साइमन मूरेस ने कहा, “सच तो यह है कि ये दुर्लभ खनिज पदार्थ चीन अपने संसाधनों में सबसे शक्तिशाली राजनीतिक उपकरण के रूप में प्रयोग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि रक्षा विभागों के लिए “दुर्लभ खनिज एक महत्वपूर्ण और विशेष निर्णायक वस्तु है।” अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका ने 2018 में 160 मिलियन डॉलर मूल्य के दुर्लभ खनिज पदार्थों न अन्य वस्तुओं का आयात किया जो पिछले वर्ष से 17 प्रितशत अधिक था।अमेरिकी कांग्रेस अनुसंधान की 2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार एफ-35 लाइटनिंग विमान जो दुनिया का सबसे अधिक आधुनिक विमान समझा जाता है, के निर्माण में अनुमानित 920 पौंड दुलर्भ खनिज धातुओं का प्रयोग किया जाता है। ये पेंटागन की सबसे अधिक खर्चीली प्रणाली है और पहला लड़ाकू विमान है जो अमेरिकी सेना के तीनो विंगों की सेवा के लिए डिजाइन किया गया था ।