
जीवन की उत्पत्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाले एक नये अध्ययन में दावा किया गया है कि करीब 60 करोड़ साल पहले वैश्विक हिमयुग ने धरती के स्वरूप को आश्चर्यजनक तरीके से बदल दिया था। पत्रिका टेरा नोवा में प्रकाशित शोध में इस बात का अध्ययन किया गया कि पृथ्वी के हिमाच्छादित होने (स्नोवॉल अर्थ) के बाद लाखों सालों के अंतराल में विशेष कार्बनयुक्त अवसादी शैलों का निर्माण कैसे हुआ।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जिस तरह आज ऊष्णकटिबंधी समुद्रों में चूना पत्थर पाये जाते हैं उसी तरह धरती से निकली मिट्टी और रेत से समुद्रों में अवसादी शैल बन गये। चट्टनों के टूटने से किसी स्थान पर जमाव के परिणाम स्वरुप उनके अवसादों से निर्मित शैल को अवसादी शैल कहा जाता है।
प्रमुख अनुसंधानकर्ता एडम नॉर्ड्सवान ने कहा कि पहले सोचा जाता था कि 10 हजार साल से भी कम समय के अंतर में ये विशेष कार्बनयुक्त चट्टानें जमा हुईं जब पूरी पृथ्वी पर फैली बर्फ की चादर पिघलने की वजह से समुद्र का स्तर बढ़ गया था। लेकिन हमने देखा कि वे समुद्र स्तर बढ़ने के बाद हजारों लाखों सालों में जमा हुए हो सकते हैं। कर्टिन्स स्कूल ऑफ अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंसेस के मिलो बरहम ने कहा कि इन निष्कर्षों के जटिल जीवन की उत्पत्ति को लेकर महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकते हैं।
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