
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र में पाकिस्तान ने मंगलवार को एक बार फिर वही पुराना कश्मीर राग अलापा। पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने कश्मीर मसला उठाते हुए कश्मीर से तत्काल संचार प्रतिबंध हटाने और सभी नेताओं की रिहाई व कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता से सिर्फ भारत को प्रोत्साहन ही मिलेगा।
हालांकि, भारत ने हर बार कहा है कि कश्मीर उसके देश का आतंरिक विषय है, इसलिए वह किसी बाहरी शक्ति का इसमें हस्तक्षेप नहीं बर्दाश्त करेगा। लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा है। वह हर मंच का इस्तेमाल कश्मीर विरोध को लेकर करता आया है। इसके पूर्व भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सामने पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठा चुका है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि अगर भारत कुछ नहीं छिपा रहा है तो उसे यूएन की समिति को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि माहौल बिगाड़ने के लिए दो जुमले चाहिए, लेकिन हम हालात खराब नहीं करना चाहते। मैं कहने को बहुत कुछ कह सकता हूं, लेकिन मामले को बिगाड़ना नहीं चाहता। कुरैशी ने कहा कि हम अमन चाहते हैं। हम दोनों मुल्कों की बेहतरी और विकास चाहते हैं। कश्मीर के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान नैतिक, राजनीतिक और राजनयिक हर तरह से समर्थन देगा।
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