
रूस ने जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच दावा किया है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) किसी गुप्त ठिकाने पर छिपे हुए हैं और उन्हें बचाने के लिए अमेरिकी नेवी सील और ब्रिटिश SAS कमांडोज तैनात किए हैं। इस बीच अमेरिका से खबरें आ रही हैं कि राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने जेलेंस्की के लिए खास गिफ्ट भेजा है, जिससे वे लगातार संपर्क में रहेंगे। यही नहीं, जेलेंस्की शॉर्ट नोटिस पर भी बाइडेन तक सीधे पहुंच रख सकेंगे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के करीबी सूत्रों के अनुसार, यूएस ने NATO आईटी एसेट लैपटॉप जेलेंस्की को भेजा है, जिससे यूक्रेन का कम्यूनिकेशन नाटो देशों से लगातार बना रह सके। यूक्रेन की डोनेट्स्क पीपुल्स रिपब्लिक फोर्स (Donetsk People Republic) ने राइट सेक्टर नियो-नाजी अर्धसैनिक समूह से संबंधित एक मुख्यालय में इसके पहुंचने की सूचना दी है। यही नहीं, अखबार के अनुसार, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के पास मोबाइल एन्क्रिप्टेड संचार उपकरण हैं, जो हर समय उनके साथ रहता है।
जेलेंस्की इस मोबाइल से 24 X 7 यानी किसी भी वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात कर सकते हैं। कथित तौर पर जेलेंस्की ने शनिवार को बाइडेन के साथ 35 मिनट की कॉल के लिए इसी उपकरण का इस्तेमाल किया था। बता दें कि इससे पहले भी बाइडेन ने यूक्रेन को मदद का आश्वासन देते रहे हैं। हालांकि, जेलेंस्की ने जिन मांगों को लेकर नाटो का दरवाजा खटखटाया था, जैसे-यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित किया जाए, उनमें अभी बात नहीं बनी है।
दूसरी ओर, द सन से ब्रिटेन के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, ‘सबसे संभावित विकल्प जेलेंस्की को कीव से बाहर निकालना है। हमारे पास ऐसे विमान हैं, लेकिन वहां से दूरी काफी महत्वपूर्ण है। जेलेंस्की ने नाटो और अमेरिका से यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित करने की अपील की। उन्होंने अमेरिकी सांसदों से यहां तक कह दिया कि शायद आप हमें आखिरी बार जिंदा देख रहे हैं।
नाटो देशों ने यूक्रेन को नो फ्लाई जोन बनाने से इनकार कर दिया है। अगर यूक्रेन को नो फ्लाई जोन बनाने की घोषणा हो जाती है तो यह सभी अनधिकृत विमानों को यूक्रेन के ऊपर उड़ान भरने से रोक देगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को कहा था कि मास्को यूक्रेन पर किसी भी तीसरे पक्ष द्वारा नो फ्लाई जोन बनाने की घोषणा को सशस्त्र संघर्ष में भागीदार मानेगा। जिसके बाद से अमेरिका और दूसरे सभी नाटो देश पीछे हट गए हैं।
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