
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान की सरकार ने राजनयिक पासपोर्ट जारी कर दिया है। देश में मची उथल-पुथल के बीच अब माना जा रहा है कि नवाज तीन साल बाद वापसी कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय की तरफ से मिले क्लीयरेंस के बाद उन्हें यह पासपोर्ट जारी किया गया है। साल 2018 में जब इमरान खान देश के प्रधानमंत्री बने थे तो उनकी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप में नवाज को गिरफ्तार किया गया था। साल 2019 में नवाज इलाज के लिए लंदन गए थे और तब से वहीं रहे रहे हैं।
नवाज को मिली थी सात साल की सजा – पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक कि भ्रष्टाचार के आरोपों में एक पाकिस्तानी अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार ने शरीफ का राजनयिक पासपोर्ट रद्द कर दिया था। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) प्रमुख शरीफ (72) को गुरुवार को विदेश मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद पांच साल की अवधि के लिए राजनयिक पासपोर्ट जारी किया गया था। नियमों के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री राजनयिक पासपोर्ट रखने के हकदार हैं। शरीफ भ्रष्टाचार के आरोप में कोट लखपत जेल में सात साल की जेल की सजा काट रहे थे, जब लाहौर उच्च न्यायालय ने उन्हें चार सप्ताह की जमानत दी थी और उन्हें इलाज के लिए देश छोड़ने की अनुमति दी थी।
बेटी ने किया था इशारा – नवाज की बेटी मरियम ने इस महीने की शुरुआत में इशारा किया था कि उनके पिता पर अब कोई भी केस नहीं है और ऐसे में वह कभी भी देश वापस आ सकते हैं। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने भी माना है कि शरीफ परिवार के खिलाफ एवेनफील्ड अपार्टमेंट्स केस में जो आदेश जारी किया गया था, वह गलत था। लंदन में नवाज शरीफ और पाकिस्तान में उनके वकील दिन रात मेहनत कर रहे थे कि उन पर लगे सभी आरोप खत्म हो जाएं। लंदन में होने के बाद भी नवाज लगातार अपने भाई को सलाह देते रहते हैं।
भाई को दी इमरान पर सलाह – कुछ ही दिनों पहले उन्होंने भाई और वर्तमान पीएम शहबाज शरीफ को इमरान खान पर एक सलाह दी थी। है। नवाज ने उन्हें बताया है कि इमरान का सामना करने के लिए उन्हें क्या करना होगा। नवाज ने शहबाज से कहा है कि उन्हें आजादी मार्च के सिलसिले में इमरान से बातचीत करने की कोई जरूरत नहीं है। नवाज ने कहा था कि शहबाज को न तो इमरान की कोई मांग मानने की जरूरत है और न ही पूर्व पीएम को किसी तरह का कोई सम्मान देना चाहिए। चाहे इमरान दो हजार लोगों को इकट्ठा करें या फिर 20 हजार लोगों को।
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