
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं। वह यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। इस सम्मेलन में मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के भाग लेने की उम्मीद है। इनमें से अधिकतर देश पूर्व सोवियत संघ के समय के हैं। इसके चंद दिनों पहले इंडोनेशिया के बाली में जी-20 सम्मेलन का आयोजन हुआ था। उस सम्मेलन में दुनिया की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्था वाले देशों में से अधिकतर देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, यूक्रेन संकट के कारण बहिष्कार के डर से पुतिन जी-20 सम्मेलन में शामिल नहीं हुए।
सम्मेलन में ऊर्जा बाजार पर बात करेंगे पुतिन – रूसी मीडिया स्पुतनिक के अनुसार, बिश्केक में व्लादिमीर पुतिन के अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान से मिलने की उम्मीद है। क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने गुरुवार को बताया था कि कहा कि ईएईयू के नेता शिखर सम्मेलन के दौरान साझा गैस बाजार के गठन पर चर्चा करेंगे। ईएईयू की अध्यक्षता जनवरी 2023 से रूस को सौंपी जाएगी। जनवरी 2015 में स्थापित ईएईयू में आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस शामिल हैं।
पुतिन के बिश्केक जाने से क्या फायदा – पुतिन की कोशिश मध्य एशियाई देशों को रूस के करीब बनाए रखने की है। यूक्रेन पर आक्रमण के कारण अधिकतर देश रूस के खिलाफ हो गए हैं। रूस की सीमा के नजदीक मौजूद स्वीडन और फिनलैंड ने तो नाटो की सदस्यता भी ले ली है। ऐसे में पुतिन मध्य एशियाई देशों को एक बड़े बफर जोन की तरह देख रहे हैं। वे इन देशों की मदद से रूस की स्वीकार्यता को विश्व में बढ़ाने की कोशिश भी कर रहे हैं।
उज्बेकिस्तान भी बन सकता है सदस्य – बैठक में उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अरिपोव के भी शामिल होने की योजना है। उज्बेकिस्तान ईएईयू का एक पर्यवेक्षक है और उसने संकेत दिया है कि देश परिषद में शामिल हो सकता है, लेकिन उसने अभी तक पूरी तरह से सदस्यता हासिल नहीं की है।
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