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सोने के खजाने और बियर को तरस जाएगा वैगनर ग्रुप… रूस में फेल हुई बगावत, हाथ से निकल जाएगा अफ्रीका?


पिछले हफ्ते वैगनर ग्रुप की ओर से विफल विद्रोह का असर अफ्रीका पर भी पड़ सकता है, जहां समूह के हजारों लड़ाके और कई व्यापारिक हित मौजूद हैं। फिलहाल यह साफ नहीं है कि वैगनर चीफ येवगेनी प्रिगोझिन, जिन्हें बेलारूस भेज दिया गया है, क्या वहीं से अपनी प्राइवेट आर्मी को ऑपरेट करेंगे ताकि वह सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (CAR) और माली जैसी जगहों पर अपने सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा कर सके। सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सीएआर और माली को उनकी महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के बारे में यथास्थिति का आश्वासन दिया। अगर अफ्रीका में वैगनर ग्रुप की भूमिका पर असर पड़ा तो यह समूह के लिए बड़ा झटका होगा, आइए जानते हैं कैसे।
सवाल यह है कि वैगनर ग्रुप अफ्रीका में क्या कर रहा है? इसका मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना है। इसे क्रेमलिन से मौन स्वीकृति मिली हुई है और इसने रूस के राजनयिक और आर्थिक हितों को भी बढ़ावा दिया है। 2021 में माली से फ्रांसीसी सेना की वापसी के बाद जब वैगनर ग्रुप इस्लामी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में नए सैन्य शासन की मदद करने के लिए तैयार हुआ तो यह रूस के लिए ‘वरदान’ जैसा था। वैगनर ने हाल ही में टेलीग्राम पर एक टाइमलाइन शेयर की थी जिससे पता चलता है कि अफ्रीका में ग्रुप की आधिकारिक भागीदारी 2018 में शुरू हुई थी। पहले उसने अपने ‘मिलिट्री इंस्ट्रक्टर’ सीएआर और सूडान में भेजे और फिर अगले साल लीबिया की ओर बढ़ गया।