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क्या इंडिया की जगह भारत का इस्तेमाल कर सकते हैं? कानूनी एक्सपर्ट ने बताया मोदी सरकार को क्या करना होगा


G20 सम्मेलन के मौके पर राष्ट्रपति की ओर से 9 सितंबर को डिनर के लिए प्रेसिडेंट ऑफ भारत के नाम से निमंत्रण भेजे जाने के बाद इस पर सियासी चर्चा शुरू हो गई है। संसद के विशेष सत्र के पहले इसको लेकर चर्चा और भी तेज हो गई है। इन सबके बीच सवाल है कि क्या आधिकारिक तौर पर इंडिया की जगह भारत का प्रयोग हो सकता है। यदि संभव है तो इसके लिए क्या कदम उठाने होंगे। कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऑफिशियल कम्युनिकेशन में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ के उपयोग में कोई गैर कानूनी जैसी बात नहीं है। क्योंकि यह संविधान का हिस्सा है जिसमें ‘इंडिया, दैट इज भारत’ लिखा है, इसका मतलब है कि इंडिया जो कि भारत है। हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञ इस एक बात पर एकमत थे कि सरकार यदि प्रस्तावना में ‘इंडिया’ की जगह भारत जोड़ना चाहती है तो संविधान संशोधन करना पड़ेगा। इसके लिए लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित होने वाले संवैधानिक संशोधन की जरूरत होगी साथ ही कम से कम आधे राज्यों द्वारा इसकी पुष्टि।
इंडिया जो कि भारत का मतलब साफ है कि दोनों शब्दों का इस्तेमाल सरकार जहां चाहे कर सकती है। वर्तमान में सरकार की ओर से इंडिया का प्रयोग किया जाता रहा है। इसे एक सरकारी आदेश द्वारा ‘भारत’ से प्रतिस्थापित किया जा सकता है जिसके लिए संसद द्वारा अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
स्वतंत्रता के समय प्रचलित संवैधानिक इतिहास और स्थिति के बारे में बताते हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि संविधान निर्माताओं का इरादा भी ‘भारत’ का उपयोग करना था और इसलिए, इसमें कुछ भी गलत नहीं था। हालांकि यदि इंडिया को हटाना है तो अनुच्छेद 368 के तहत एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी।
सबसे पहले लोगो के कलर की बात करते हैं। G20 के लोगो को हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंग के रंगो से सजाया गया है। इसमें केसरिया, सफेद और हरा रंग देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार समिट भारत में हो रही है। ऐसे में ये लोगो भी तिरंगे से प्रेरित है।
वहीं लोगो में कमल के फूल को पृथ्वी के ऊपर लगाया गया है। कमल हमारा राष्ट्रीय फूल है और ये भारत की संस्कृति, धरोहर, आस्था और बौद्धिकता को दर्शाता है। पृथ्वी के साथ इसे जोड़ना का संदेश है कि ये चुनौतियों के बीच विकास को दर्शाता है।
लोगो के नीचे देवनागरी लिपि में ‘भारत’ लिखा हुआ है। साथ ही साल ‘2023’ भी लिखा हुआ है। ये इस बात को बता रहा है कि इस साल जी20 समिट भारत में हो रही है।
अगर इस साल G20 समिट की थीम की बात करें, तो वो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’। ये संस्कृत भाषा का वाक्य है, जिसे भारत के प्राचीन महाउपनिषदों से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’।
G20 के इस लोगो को डिजाइन करने के लिए ओपन कॉम्पिटिशन हुआ था, जिसमें 2000 से ज्यादा एंट्रीज हुईं। इस लोगो को सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने डिजाइन किया।
पूर्व कानून सचिव पी के मल्होत्रा ने कहा कि राष्ट्रपति की ओर से निमंत्रण में इंडिया के बजाय भारत के उपयोग पर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। संविधान का अनुच्छेद 1, जो विशेष रूप से कहता है इंडिया जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा। व्यवहार में हम ‘इंडिया’ का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है जो हमें अपने देश का वर्णन करते समय ‘भारत’ का उपयोग करने से रोकता है। मल्होत्रा ने कहा कि दोनों के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। यह पसंद का मामला है, और ‘भारत’ का उपयोग करना हमारी पसंद होनी चाहिए। ‘भारत’ के इस्तेमाल के लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। इसरो, सचिन, नाटू-नाटू… कांग्रेस सांसद ने एक साथ क्यों लिए ये नाम
वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता ने कहा कि ‘इंडिया’, ‘भारत’ का पर्याय है और इसलिए इसका परस्पर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा यदि संविधान से ‘इंडिया’ को पूरी तरह से हटाना है तो संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें ‘इंडिया’ का नाम बदलकर ‘भारत’ करने की मांग की गई थी। भारत या इंडिया? आप इसे भारत कहना चाहते हैं, कोई दिक्कत नहीं। कोई इसे इंडिया कहना चाहता है, उसे इसे इंडिया कहने दें, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने यह बात कही थी।