
पाकिस्तान पर एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) की ओर से भी उसे निगरानी सूची (ग्रे- लिस्ट) में डाले जाने का जोखिम मंडरा है। मीडिया की खबरों में मंगलवार को कहा गया कि मनी लांड्रिंग और आतंक के वित्तपोषण रोकने के मामले में पाकिस्तान 40 सिफारिशों में से करीब 70 प्रतिशत का अनुपालन नहीं कर पाया है। पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) जून, 2018 में ही पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाल चुका है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मनी लांड्रिंग पर एशिया प्रशांत समूह के किसी तरह के प्रतिकूल निष्कर्ष से पाकिस्तान सरकार के लिए इस मामले में समस्या और जटिल हो सकती है।
एपीजी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पाकिस्तान पहुंचा है और वह इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या पाकिस्तान ने इस मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति की है। पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद से पाकिस्तान पर पहले से ही जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी समूहों पर पाबंदी लगाने को लेकर काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव है। एपीजी एशिया प्रशांत क्षेत्र में एफएटीएफ जैसी ही एक क्षेत्रीय संस्था है। यह क्षेत्र की सरकारों के बीच बनी संस्था है जिसकी स्थापना 1997 में की गई थी। एपीजी की आपसी मूल्यांकन प्रक्रिया हालांकि एफएटीएफ से अलग है लेकिन यह एफएटीएफ की 40 सिफारिशों के क्रियान्वयन पर ही आधारित होती है।
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