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अमेरिका के लिए खतरे की घंटी? भारत-चीन आ रहे बेहद करीब, फ्लाइट शुरू होने के बाद अब इन दो चीजों पर फोकस


अमेरिका की विदेश नीति के कारण चीन और भारत अब बेहद करीब आने लगे हैं। पहले दोनों देशों के बीच फ्लाइट सेवा सुरू हुई और अब दो और क्षेत्रों में भारत-चीन अपने संबंध बढ़ाने जा रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति अमेरिका को बेहद भारी पड़ सकती है। क्योंकि भारत ने अब चीन के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। बराक ओबामा और जो बाइडन ने मेहनत करके भारत के साथ जो रिश्ते मजबूत किए थे, अब लगने लगा है कि डोनाल्ड ट्रंप उन्हें पूरी तरह से मिट्टी में दफन करके ही मानेंगे। आइए आपको बताते हैं कि भारत और चीन के बीच फ्लाइट शुरू होने के बाद वो दो क्षेत्र कौन से हैं, जिसमें दोनों देश अपने संबंध मजबूत करने जा रहे हैं।
दरअसल, चीन और भारत का पूरा फोकस अब संस्कृति और लोगों के बीच होने वाले आदान प्रदान पर है। विदेश मंत्रियों की अध्यक्षता वाले इस तंत्र की अब तक दो बार बैठक हो चुकी है। हालांकि ये दोनों बैठकें 2018 और 2019 में हुई थीं। लेकिन अब एक बार फिर इस फोरम की बैठक होने जा रही है। तीसरी बैठक भारत की राजधानी दिल्ली में होने की उम्मीद है। दरअसल, भारत-चीन सांस्कृतिक तंत्र स्थापित करने का निर्णय अप्रैल 2018 में वुहान में मोदी और शी के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के दौरान किया गया था।
कैलाश यात्रा फिर से शुरू – खास बात यह है कि शंघाई से दिल्ली के लिए जिस विमान ने पहली उड़ान भरी उसकी 95 फीसदी सीटें भरी हुई थीं। फ्लाइट शुरू करने के अलावा भी भारत और चीन ने संबंध सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। कैलाश यात्रा फिर से शुरू हो गई है। चीनी नागरिकों को टूरिस्ट वीजा दिया जा रहा है। हालांकि, भारत को उम्मीद है कि चीन भारत की उर्वरक और सुरंग खोदने वाली मशीनों की जरूरतों को पूरा करेगा।
निवेश बढ़ाने पर दिया जोर – तियानजिन में अगस्त महीने में हुई बैठक में पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंध बढ़ाने पर जोर दिया था। इस दौरान व्यापार घाटा कम करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था। इसके बाद अब दक्षिण अफ्रीका में होने जा रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं के बीच फिर मुलाकात हो सकती है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शी जिनपिंग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं।