
प्रेग्नेंसी के दौरान कई कॉम्प्लिकेशन्स सामने आ सकते हैं, जिनमें से एक ब्रीच पोजिशन भी है। क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, ब्रीच बेबी वह स्थिति होती है, जब गर्भ में बच्चे का पैर या हिप्स (hips) डिलीवरी के समय योनि से पहले बाहर आने की स्थिति में होता है। यानी इस अवस्था में बच्चे का सिर ऊपर की ओर होता है और उसका निचला शरीर योनि के सबसे करीब होता है।
यह स्थिति नॉर्मल डिलीवरी के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती है, क्योंकि इस तरह के प्रसव में कई जोखिम जुड़े होते हैं। जैसे शिशु के हाथ-पैर में चोट लगना या हड्डियां टूटना। आइए, इस विषय को विस्तार से समझते हैं और यह भी जानते हैं कि डिलीवरी के लिए कौन-सी पोजिशन सबसे बेहतर मानी जाती है।
आमतौर पर डिलीवरी के लिए गर्भ में शिशु की सबसे बेहतर स्थिति वर्टेक्स पोजिशन मानी जाती है। इस स्थिति में गर्भ में बच्चे का सिर नीचे होता है और उसकी ठुड्डी छाती से लगी होती है। वहीं, आमतौर पर अधिकतर भ्रूण 36 सप्ताह तक सिर के बल वाली स्थिति में आ जाते हैं। लेकिन जब ऐसा नहीं होता है, तब वह ब्रीच पोजिशन कहलाती है। यह तीन प्रकार की होते हैं, जिसकी जानकारी नीचे डिटेल में दी जा रही है:
फ्रैंक ब्रीच: इसमें बच्चे के हिप्स योनि की ओर होते हैं। उसके पैर शरीर के सामने सीधे ऊपर की ओर उठे होते हैं (यानी उसके पैर चेहरे के पास होते हैं)।
कम्प्लीट ब्रीच: इसमें शिशु के हिप्स नीचे की ओर होते हैं और उसके हिप्स व घुटने दोनों मुड़े हुए होते हैं (भ्रूण अपने मुड़े हुए पैरों पर बैठा होता है)।
फुटलिंग ब्रीच: इसमें शिशु के एक या दोनों पैर नीचे की ओर होते हैं और वे डिलीवरी के दौरान शरीर के बाकी हिस्सों से पहले बाहर आ सकते हैं।
ट्रांसवर्स lie: इसमें शिशु गर्भाशय में वर्टिकल (सीधा) होने के बजाय हॉरिजॉन्टल (आड़ा) स्थिति में होता है। ऐसी स्थिति में डिलीवरी के दौरान शिशु का कंधा सबसे पहले योनि में प्रवेश कर सकता है।
ब्रीच पोजिशन के कारण क्या हैं? – प्रेग्नेंसी में जुड़वां, तिगुने या उससे अधिक बच्चों का होना
एम्नियोटिक फ्लूइड (गर्भ का पानी) की मात्रा बहुत अधिक या बहुत कम होना
गर्भाशय का आकार असामान्य होना, जो फाइब्रॉइड, गर्भाशय सेप्टम या अन्य मेडिकल स्थितियों के कारण हो सकता है
जन्मजात दोष के कारण भी भ्रूण ब्रीच इस पोजिशन में हो सकता है।
ब्रीच पोजिशन के जोखिम क्या हैं ? ब्रीच पोजिशन के जोखिम (Image- freepik)
ब्रीच पोजिशन आमतौर पर प्रेग्नेंसी को प्रभावित नहीं करती है, लेकिन कॉम्प्लिकेशन्स मुख्य रूप से डिलीवरी के समय पैदा होते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में ब्रीच पोजिशन में नॉर्मल डिलीवरी संभव हो सकती है, लेकिन इसमें जोखिम होते हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी जा रही है।
शिशु के पैरों या हाथों में चोट लग सकती है, जैसे हड्डियों का अपनी जगह से हट जाना या टूट जाना।
प्रसव के दौरान शिशु का सिर फंस सकता है या अटक सकता है। – डिलीवरी के दौरान अम्बिलिकल कॉर्ड चपटी या या मुड़ सकती है। इससे शिशु के मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे तंत्रिकाओं या मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है।
नोट: इन जोखिमों को देखते हुए ही इस पोजिशन में डॉक्टर अक्सर सिजेरियन डिलीवरी (C-section) की सलाह दे सकते हैं।
बच्चे को नहीं होती कोई समस्या – अंत में, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि जन्म के समय ब्रीच पोजिशन वाले अधिकांश बच्चे स्वस्थ होते हैं और इस स्थिति के कारण उन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं नहीं होती हैं। हालांकि, ब्रीच पोजिशन में रहने के कारण डिलीवरी के बाद चाइल्ड स्पेशलिस्ट शिशु के कूल्हों की अच्छी तरह से जांच करते हैं और अगर आवश्यक हो, तो आगे की देखभाल के लिए सुझाव देते हैं।
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