
दावोस। भारत को वैश्विक निवेश के गंतव्य के रूप में पेश करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां मंगलवार को दुनिया को बढ़ते संरक्षणवाद के खिलाफ चेताया और कहा कि टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं बढ़ रही हैं, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और ‘आत्मकेंद्रित’ होना दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। विश्व आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भूमंडलीय वास्तविकताओं के चलते आर्थिक और राजनीतिक सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता है।
मोदी ने अपने भाषण में पिछले तीन सालों में अपनी सरकार द्वारा किए गए सुधारों को रेखांकित किया और कहा कि सरकार लालफीताशाही खत्म कर चुकी है और उसकी जगह लाल कालीन बिछा चुकी है और परिवर्तनकारी सुधारों की कार्ययोजना तैयार की है।
उन्होंने कहा, “आज भारत में निवेश, भारत की यात्रा, भारत में काम, भारत में निर्माण, भारत से उत्पादन और निर्यात दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए पहले की तुलना में आसान है, क्योंकि हमने ‘लाइसेंस-परमिट राज’ को खत्म करने और लालफीताशाली को खत्म करने का निर्णय लिया है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अब स्वचालित रास्ते के जरिए 90 फीसदी से अधिक क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संभव है। पिछले साढ़े तीन साल में, सरकार ने 1,400 पुराने कानूनों को खत्म कर दिया है।
लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और गतिशीलता को विकास के उपकरणों के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सभी कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गो के उत्थान को समर्पित हैं और उनका उद्देश्य ‘सबका विकास’ है।
उन्होंने कहा, “इन सुधारों ने 2025 तक भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए युवाओं को काम करने के लिए प्रेरित किया है।” नवाचार और उद्यमशीलता युवाओं को नौकरी की तलाश करने के बजाए नौकरी प्रदान करनेवाला बनने का मौका दे रहा है।
1997 में एचडी देवेगौड़ा के बाद, मोदी करीब दो दशकों के बाद फोरम की बैठक में भाग लेने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।
मोदी ने कहा, “दुनिया के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन मुझे लगता है कि तीन मुख्य चुनौतियां हैं, जो वैश्विक समुदाय के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।”
उन्होंने कहा, “आतंकवाद हर सरकार की चिंता है। आतंकवाद तब और भयावह हो जाता है, जब हम अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच कृत्रिम अंतर करते हैं।”
मोदी ने कहा कि कई समाज और देश आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह वैश्वीकरण प्रतीत होता है, लेकिन यह ठीक उसका उल्टा है। आज हर कोई इंटर कनेक्टेड दुनिया के बारे में बात करता है, लेकिन ऐसा लगता है कि वैश्वीकरण लुप्त होता जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि प्रगति और विकास को वास्तव में तभी विकास कहा जा सकता है जब हर कोई इसमें हिस्सा ले सकता हो।”
यह लगभग मोदी की दो सालों में स्विट्जरलैंड की दूसरी यात्रा है। वह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार परिषद के 120 सदस्यों के साथ बातचीत करेंगे, जो कि डब्ल्यूईएफ का हिस्सा है।
मोदी, दावोस की अपनी 24 घंटे की यात्रा के दौरान, स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफेन से भी मिलेंगे।
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