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निजी स्वतंत्रता के मामलों को कोर्ट में सबसे पहले सुना जाएगा… CJI सूर्यकांत की दो टूक


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने ‘यूनिफाइड ज्यूडिशियल पॉलिसी’ की घोषणा की, जिसके तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा बढ़ेगा।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को ‘ यूनिफाइड ज्यूडिशियल पॉलिसी ‘ (UJP) के बारे में बताते हुए कहा कि अब अदालतों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को सबसे पहले सुना जाएगा। साथ ही, व्यापार और आर्थिक मामलों में फैसलों में एकरूपता लाई जाएगी ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़े। परिवार, उपभोक्ता और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में भी अदालतों का रवैया सहानुभूतिपूर्ण रहेगा।
जैसलमेर में रीजनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए CJI ने कहा कि लोग सिर्फ इंसाफ पाने के लिए ही नहीं, बल्कि इस उम्मीद से भी अदालतों में आते हैं कि कानून का पालन ठीक से होगा, उनकी आजादी की रक्षा होगी, उनके हक साफ होंगे और सरकारें जवाबदेह होंगी।
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उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का समझ में आने वाला होना बहुत जरूरी है। अगर अदालती भाषा आसान हो, तो आम लोग इसे बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और सिस्टम पर उनका भरोसा बना रहेगा। CJI ने बताया कि फैसलों में एकरूपता, सही वजहें, पुराने फैसलों का ध्यान रखना और समय पर मामलों का निपटारा होना ही इस समझदारी की जड़ें हैं।
CJI कांत ने कहा, ‘अगर न्याय व्यवस्था का तरीका समझ से बाहर हो या उसके कोई तय सिद्धांत न हों, तो लोगों का भरोसा कम हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोग यह नहीं समझ पाते कि ऐसे ही दूसरे मामलों में क्या होगा या उनके मामले कब सुलझेंगे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जब अदालती फैसले सोच-समझकर, कानून के लगातार इस्तेमाल से और नियमों के पारदर्शी विकास से होते हैं, तो अदालतों पर भरोसा बढ़ता है। लोग समझ जाते हैं कि इंसाफ किस्मत से नहीं, बल्कि तय नियमों से मिलता है।’