
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति समझौते पर ईरान नजर आ रहा है। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अहम सहयोगी ने ट्रंप के प्रस्तावित गलियारे को एक साजिश बताया है। वहीं, रूस ने इस पर एक सधी प्रतिक्रिया दी है।
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद दोनों देशों के बीच दशकों पुराने संघर्ष को खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं दिखाई दे रहा है। क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिक्रियाओं ने इस समझौते को लेकर संशय पैदा कर दिया है। रूस ने जहां इस समझौते को लेकर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। वहीं, मॉस्को के क्षेत्रीय सहयोगी ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित सीमा गलियारे को अस्वीकार कर दिया है। भारत ने इस समझौते पर प्रतिक्रिया दी है।
आर्मेनिया और अजरबैजान ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य 4 दशक से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करना है। हालांकि, इस समझौते की विशिष्टताएं और कानूनी वैधता अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। योजना का एक प्रमुख तत्व अजरबैजान को उसके नखचिवन क्षेत्र से जोड़ने वाला पारगमन गलियारा है, जो आर्मेनिया से होकर गुजरता है। बाकू लंबे समय से इस गलियारे की मांग करता रहा है। इस गलियारे का नाम ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (TRIPP) रखा गया है।
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website