
दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय का मुख्य कारण पार्टी की विचारधारा और संदेश को जनता तक प्रभावी ढंग से न पहुंचा पाना, अल्पसंख्यक और दलित वोटरों को अपने साथ नहीं जोड़ पाना, और नेतृत्व की अनिश्चित भागीदारी रही।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीरो की हैटट्रिक बनाई है। हालांकि क्रिकेट में हैटट्रिक का रिकॉर्ड किस्मत वाले को ही मिलता है, लेकिन चुनावी जमीन पर खेले गए इस मैच में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा कि एक बार फिर एक भी सीट नहीं जीत पाए। चुनाव में हार और बेहतर प्रदर्शन, दोनों में कांग्रेस को मनमाफिक कामयाबी नहीं मिली। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता भी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। कांग्रेस के प्रदर्शन की इस वजह के कई कारण हैं।
पहली – इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपना नैरेटिव सेट नहीं कर पाई। मतलब पार्टी अपनी विचारधारा, मुद्दों और चुनावी संदेश को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाने में सफल नहीं हो सकी। यहां तक कि कांग्रेस के वर्कर भी उधेड़बुन में रहे। सत्ता के खिलाफ किस स्तर पर हमला करना है, क्या रणनीति रहेगी, यह कांग्रेस अपने वर्कर तक पहुंचाने में असफल रही, इसलिए चुनाव कभी उठता ही नहीं दिखा। हां, कुछ सीटों पर उम्मीदवार अपने दम पर जरूर ताकत दिखाते नजर आ रहे थे।
दूसरी वजह – कांग्रेस का फोकस अल्पसंख्यक और दलित वोटरों पर ज्यादा रहा। बार-बार राहुल गांधी ने भी अपने संबोधन में उनकी आवाज बनने की बात तो कही, लेकिन कांग्रेस उन्हें इसका विश्वास नहीं दिला पाई कि वो सरकार बना रही है। यह समुदाय हमेशा सत्ता के साथ रहना चाहता है, इसी में वे खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। इसलिए तमाम प्रयास के बाद भी अल्पसंख्यक और दलितों का वोट कांग्रेस को नहीं मिला, जो इनकी हार की सबसे बड़ी वजह मानी जा सकती है।
तीसरी वजह – कांग्रेस के टॉप लीडरशिप के चुनाव प्रचार में इन्वॉल्वमेंट में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। संगठन को मजबूत करने की दिशा में निकाली गई न्याय यात्रा से टॉप लीडर दूर रहे। कई बार योजना बनी, जिसे रद्द कर दी गई। चुनाव प्रचार के दौरान भी पार्टी के स्टार प्रचारक राहुल गांधी अचानक 15 दिनों तक ब्रेक पर चले गए। प्रियंका गांधी अंतिम दौर में जाकर चुनावी मैदान में उतरीं, तब तक बीजेपी और आम आदमी पार्टी अपना अपना नैरेटिव सेट कर चुकी थी।
चौथी वजह – कांग्रेस शुरू में अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं थी। आप की तरफ से गठबंधन नहीं करने के बयान के बाद भी राहुल गांधी चाहते थे कि गठबंधन हो, इसलिए इसके लिए प्रयास भी किए गए, लेकिन आप की तरफ से कांग्रेस को कभी सीरियसली नहीं लिया गया। इस दौरान पार्टी के वर्करों में भ्रम बनी रही, काफी समय बर्बाद हुआ और अंत में पार्टी चुनाव में जरूर उतरी, लेकिन 10 से 12 सीटों को छोड़कर पार्टी के पास अच्छे उम्मीदवारों का भी संकट था।
पांचवी वजहकई सीटों पर लोकल उम्मीदवारों को तवज्जो नहीं मिली। दूसरे इलाके के नेताओं को थोपा गया। भले ही कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेता हो, चाहे अलका लांबा हो, राजेश लिलोठिया हो या फिर रागिनी नायक ही क्यों न हो, लोकल उम्मीदवार के नहीं होने की वजह से इसका नुकसान हुआ। वहीं, लोकल और जमीन पर टिके रहने वाले कांग्रेस के नेता चाहे अभिषेक दत्त हों, देवेंद्र यादव हों, रोहित चौधरी हों, इन्हें स्थानीय लोगों का भरपूर साथ मिला, जिसकी वजह से इनकी जमानत बच पाई।
Home / Uncategorized / दिल्ली में कांग्रेस ने लगाई जीरो की हैटट्रिक, बुरी हार की 5 बड़ी वजह जान लीजिए
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