
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ही सुनवाई में 25 जनहित याचिकाओं का निपटारा कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित प्रशासनिक और वैधानिक प्राधिकरण के पास जाना चाहिए। अगर वहां कोई कार्रवाई नहीं होती, तभी कोर्ट का दखल जरूरी होता है।
हर नीति से जुड़े मामले में पहली जगह नहीं कोर्ट – सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अलग-अलग मुद्दों पर जागरूक और संवेदनशील बनाना पहला कदम होना चाहिए। साथ ही, वकीलों से उम्मीद है कि वे मामलों को समझकर सही जगह का चयन करें। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका आखिरी विकल्प है, हर नीति से जुड़े मामले में पहली जगह नहीं।
किस से संबंधित थीं याचिका जिन्हें कोर्ट ने किया खारिज – इन याचिकाओं में एक समान भाषा नीति, साबुन के केमिकल के नियम, देशभर में फूड रजिस्ट्रेशन अभियान जैसी मांगें शामिल थीं।एक अन्य जनहित याचिका में भिखारियों, ट्रांसजेंडर जैसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए नीति बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने नौ मार्च को गुप्ता द्वारा दायर पांच ‘‘निरर्थक’’ जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें यह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।
इन में जाति जनगणना से संबंधित याचिका भी शामिल – जाति जनगणना पर रोक लगाने से जुड़ी अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। चीफ जस्टिस ने याचिका के कंटेंट और उसमे इस्तेमाल की गई भाषा पर गंभीर आपत्ति जताई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘ऐसी भाषा आप कहां से सीखते हैं? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते है? आप लोग याचिका कैसे लिखते है?’
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