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ईरान युद्ध पर उधर डोनाल्ड ट्रंप की स्पीच, इधर जयशंकर हुए एक्टिव, पीएम मोदी से क्यों मिले विदेश मंत्री?


अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 20 मिनट की स्पीच दी। उनके इस बयान के आते ही भारतीय विदेश मंत्रालय और एक्टिव हो गया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। यह मुलाकात तब हुई है, जब एक दिन पहले ही पीएम मोदी ने अपने आवास पर सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी (CCS) की बैठक बुलाई थी। इस मीटिंग में पश्चिम एशिया संकट को लेकर भारत की मौजूदा स्थितियों की समीक्षा की गई। पूरा मामला समझते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति बता दिया ईरान युद्ध का पूरा प्लान – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात को दिए एक संबोधन में युद्ध को लेकर अपनी आगामी योजना का खाका खींच दिया है।
ट्रंप ने बताया है कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ सारे सैन्य मकसद पूरा करने की ओर है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले दो-तीन हफ्ते में ईरान के खिलाफ जोरदार हमले करेगा।
ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान न्यूक्लियन हथियार बनाने से बस एक कदम दूर है।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कुछ हफ्तों में कोई डील नहीं होती है तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले करेगा।
ट्रंप ने करीब 20 मिनट की पूरी स्पीच में NATO का नाम नहीं लिया। वह नाटो से अलग होने का संकेत दे चुके थे।
ट्रंप संकेतों में ही कर दिया बड़ा खुलासा – ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि जिन देशों को मध्य पूर्व से तेल लेने की जरूरत है, वो हमसे ले सकते हैं।
इससे दुनिया के 20 फीसदी तेल की सप्लाई वाले रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाया जा सकेगा। ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है।
होर्मुज से सिर्फ भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही की इजाजत है।
जयशंकर के जवाब में ही छिपा है-क्यों एक्टिव हुए विदेश मंत्री- इससे पहले मार्च के आखिर में हुई एक सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की ‘चुप्पी’ के विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए यह बेहद जरूरी है कि भारत एक संतुलित स्थिति में रहे। उन्होंने कहा-भारत एक खास स्थिति में है। वह हर पक्ष के संपर्क में है।
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ईरानी अधिकारियों से बातचीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा-दो भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने दिया गया।
वहीं, 18 और जहाजों को भारतीय तटों की ओर लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर बना हुआ है। वहीं, इजरायल मुख्य तकनीकी पार्टनर है।
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत कभी भी रूस से तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं करेगा।
10 दिनों में पीएम मोदी की सुरक्षा पर दूसरी बैठक – युद्ध के बीच बीते 10 दिनों में पीएम मोदी ने सीसीएस की बैठक बुलाई थी। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे आला मंत्री शामिल थे। इस बैठक में युद्ध के प्रभावों पर चर्चा की गई। चर्चा में खेती, खाद, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, लघु एवं कुटीर उद्योग, निर्यात, जहाजरानी, कारोबार, वित्त जैसे सेक्टरों में सप्लाई चेन बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई।