
शरद पवार ने सचिन तेंदुलकर को लेकर कहा कि वह क्रिकेट के बादशाह हैं। सचिन को क्रिकेट के बारे में ही बात करनी चाहिए, न कि हिंदी भाषा के बारे में। उन्होंने राज ठाकरे के बयान का विरोध किया। शरद पवार ने कहा कि किसी खिलाड़ी को इसमें नहीं घसीटा जाना चाहिए।
शरद पवार की NCP ने 5 जुलाई को ‘हिंदी थोपने’ के खिलाफ होने वाले विरोध मार्च को समर्थन देने का ऐलान किया है। पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि सचिन तेंदुलकर जैसे मशहूर लोगों पर यह दबाव नहीं डालना चाहिए कि वे महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य करने पर अपनी राय रखें। उन्होंने कहा कि सचिन से क्रिकेट के बारे में पूछो; हिंदी थोपने पर उनसे राय लेने के लिए मजबूर मत करो।
शरद पवार, राज ठाकरे के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि वे देखना चाहते हैं कि कौन – खासकर मराठी कलाकार और खिलाड़ी – सरकार की इस नीति के खिलाफ विरोध मार्च में शामिल होता है और कौन नहीं।
क्या बोले शरद पवार – शरद पवार ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि राज ठाकरे का क्या मतलब था। सचिन तेंदुलकर पर हिंदी थोपने के मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए दबाव क्यों डालना चाहिए? उनसे क्रिकेट के बारे में पूछो, वह ‘बादशाह’ हैं, क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं। मैं समझ सकता हूं अगर उनसे क्रिकेट के किसी पहलू के बारे में उनकी राय पूछी जाए।’
राज ठाकरे के बयान पर बोले- ऐसा कहना ठीक नहीं – शरद पवार ने आगे कहा, ‘ऐसे व्यक्तित्वों से उन मुद्दों के बारे में न पूछें जो उनसे संबंधित नहीं हैं। हिंदी थोपने का मुद्दा हमारे लिए महत्वपूर्ण है। किसी से उनकी राय मांगना और यह कहना कि ‘देखेंगे कौन विरोध में आता है और कौन नहीं’ अच्छा नहीं है।’
क्या बोले जयंत पाटिल – NCP (SP) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा, ‘हम प्राथमिक विद्यालय के छात्रों पर हिंदी थोपने के खिलाफ हैं। हमने विरोध मार्च में भाग लेने का फैसला किया है। शरद पवार ने यह भी कहा कि हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी मशहूर लोगों पर दबाव नहीं डालना चाहिए।
5 जुलाई को मार्च – महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के चीफ राज ठाकरे 5 जुलाई को मुंबई में एक मार्च निकालने वाले हैं। यह मार्च राज्य के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य भाषा बनाने के खिलाफ होगा। NCP (SP) ने राज ठाकरे के 5 जुलाई के मुंबई मार्च को समर्थन देने की बात कही है।
क्या है हिंदी भाषा विवाद -पिछले हफ्ते, राज्य सरकार ने पहली कक्षा से तीन-भाषा नीति पर एक सरकारी आदेश जारी किया था। इसके बाद सरकार की काफी आलोचना हुई। फिर सरकार ने थोड़ा बदलाव किया। गुरुवार को सरकार ने कहा कि तीसरी भाषा को पहली और दूसरी कक्षा में मौखिक रूप से पढ़ाया जाएगा। छात्रों को कोई किताब नहीं दी जाएगी और कोई टेस्ट या परीक्षा नहीं होगी।
NCP (SP) चीफ ने आगे कहा कि राज्य के स्कूलों में हिंदी पांचवीं कक्षा से पढ़ाओ। हिंदी को अनदेखा करना भी अच्छा नहीं है, क्योंकि देश में लगभग 55% लोग यह भाषा बोलते हैं। उनका मानना है कि हिंदी का ज्ञान होना भी जरूरी है।
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