
समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने महसा अमिनी को शीर्ष मानवाधिकार पुरस्कार दिया है. बता दें कि पिछले साल महसा अमिनी की मौत पुलिस कस्टडी में हुई थी. उन पर हिजाब न पहनने का आरोप था. महसा की मौत के बाद महीनों तक देश में जबर्दस्त हिंसा और सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए.
महसा अमिनी की मौत पर बढ़ते बवाल को देख अधिकारियों ने सफाई दी थी कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौत हो गई. हालांकि अमिनी के समर्थकों ने कहा कि उन्हें पुलिस ने पीटा था और चोटों के कारण उनकी मौत हो गई थी.
विरोध प्रदर्शनों में हुई थी 500 से ज्यादा लोगों की मौत – रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों में 71 नाबालिगों सहित 500 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए. इतना ही नहीं, हिंसक प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से बहुत लोग आज भी जेल में हैं. इसके साथ ही 22,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया.
मानवाधिकार संगठनों ने ईरानी सुरक्षाबलों पर उठाए थे सवाल – गौरतलब है कि महसा अमिनी की मौत केवल 22 साल की आयु में हुई थी. पुलिस हिरासत में अमिनी की मौत के कारण ईरान के सुरक्षाबलों को दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों ने कठघरे में खड़ा किया था. मालूम हो कि ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद से महिलाओं को हिजाब पहनना जरूरी है.
तेहरान से बाहर रहती थीं महसा – मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब पुलिस ने महसा अमिनी को हिरासत में लिया था, तब वह तेहरान में मेट्रो से सवारी करने वाली थीं. दरअसल, वो अपने परिवार के साथ तेहरान गई थी. जबकि वह तेहरान से बाहर रहती थी. गत 16 सितंबर को महसा अमिनी की मृत्यु की पहली वर्षगांठ मनाई गई थी. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामात किए गए थे.
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