
जापान इस समय अजीबो-गरीब समस्या से जूझ रहा है। साल 2000 के अंत में इस देश की आबादी में कोई इजाफा नहीं हुआ था। साल 2010 से इस देश में जनसंख्या कम होती जा रही है। हर 10 साल में जापान की आबादी नया रिकॉर्ड बनाती है। एक बार फिर साल 2020-2021 में यहां की जनसंख्या में 644,000 तक कमी आ गई है। इस सदी के बीच में जापान की जनसंख्या में कमी की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि 45 साल में यानी 2065 तक 88 लाख लोगों की कमी जापान में हो जायेगी। तेजी से गिरती जनसंख्या के बाद भी यहां पर लोग बच्चे नहीं पैदा करना चाहते हैं।
कम प्रजनन दर – जापान में जनसंख्या कम होने की बड़ी वजह कम प्रजनन क्षमता का होना है। देश में प्रजनन दर 1970 के मध्य से ही कम हो रही है। जापान में विशेषज्ञों की मानें तो यहां पर अब लड़कियों में शादी करने की इच्छा कम हो गई है। इसकी वजह से प्रजनन क्षमता और आबादी पर असर पड़ रहा है। देश में 25 से 34 साल तक की लड़कियां शादी नहीं करती हैं। 25 से 29 साल तक की अविवाहित लड़कियों की संख्या सन् 1975 में जहां 21 फीसदी थी तो 2020 में इसमें 60 फीसदी तक का इजाफा हो गया।
शादी से कतराती लड़कियां – युवा जापानी महिलाएं अब न तो शादी करना चाहती हैं और न ही उनमें बच्चे पैदा करने की कोई इच्छा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा उन्हें मिलने वाले आर्थिक मौकों की वजह से हो रहा है। यहां पर साल 2020 में कॉलेज जाकर डिग्री लेने वाली लड़कियों की संख्या में 51 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। देश में महिलाओं के लिए रोजगार बढ़ रहा है। जापान में शादी के लिए उत्साह कम होता जा रहा है। कियो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर नोरिको सुया के मुताबिक देश में हर घर में अभी तक वही पुरानी परंपराएं जारी हैं। यहां पर महिलाओं पर पूरे घर की जिम्मेदारी है और बच्चे संभालने का दायित्व भी उनका ही है।
सरकार की कोशिशें फेल – जापान में पुरुष घरेलू कामों से बचते हैं और यह अंसतुलन सबसे बड़ी वजह है कि महिलायें न तो शादी करना चाहती हैं और न ही बच्चे पैदा करना चाहती हैं। उन्हें घर और बाहर संतुलन कायम करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब युवा लड़कियां शादी से बच रही हैं। देश में जनसंख्या में इजाफा हो इसके लिए सरकार की तरफ से सन् 1990 के मध्य में कई सुधारों को शुरू किया गया था।
कम जनसंख्या के हैं बड़े नुकसान – इसकी शुरुआत चाइल्ड केयर सर्विसेज मुहैया कराने से हुई थी। सरकार की तरफ से कई सुविधाओं के बाद भी यहां पर जन्मदर में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। तेजी से कम होती जनसंख्या एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन गई है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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