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भारत ने धुरंधर देशों से अलग चुनी राह, अमेरिका का नाम तक नहीं लिया; वेनेजुएला हमले पर अलग ही एटीट्यूड


वेनेजुएला को लेकर भारत का रुख यूक्रेन युद्ध पर उसके रुख से मिलता-जुलता है, जहां उसने रूस की निंदा से परहेज किया था। विदेश मामलों के एक्सपर्ट्स इसे इसे अपेक्षित ही मान रहे हैं।
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले को लेकर भारत ने बड़े रणनीतिक तरीके से अपनी चुप्पी तोड़ी। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद भारत सरकार ने रविवार को लैटिन अमेरिकी देश के घटनाक्रम को बहुत चिंताजनक बताया। साथ ही सभी पक्षों से बातचीत के जरिए मसलों को सुलझाने, क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील की। हालांकि, अपने अधिकतर ब्रिक्स सहयोगियों रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के उलट भारत ने मादुरो के खिलाफ अमेरिका की ‘एकतरफा’ कार्रवाई की खुलकर निंदा नहीं की।
अमेरिका का नाम तक नहीं लिया – भारत की प्रतिक्रिया वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम पर जारी एक बयान के रूप में सामने आई। भारत सरकार की तरफ से जारी बयान में अमेरिका का नाम तक नहीं लिया गया है। यूरोपीय संघ ने भी अमेरिका की एकतरफा कार्रवाई पर असहमति जताई है, हालांकि उसने वेनेजुएला के तानाशाह को मान्यता न देने के अपने रुख के साथ इसे संतुलित किया है।
भारत का संतुलित रुख – वेनेजुएला को लेकर भारत का रुख यूक्रेन युद्ध पर उसके रुख से मिलता-जुलता है, जहां उसने रूस की निंदा से परहेज किया था। विदेश मामलों के एक्सपर्ट्स इसे इसे अपेक्षित ही मान रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि भारत और अमेरिका बीते एक साल के तनाव के बाद रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देश एक अहम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिल सकती है।
केवल एक एडवाइजरी जारी की – सावधानी से दिए गए बयान में भारत ने कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा की हिमायत करता है। भारत ने यह भी कहा कि कराकस में भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय समुदाय के संपर्क में है और हरसंभव मदद जारी रखेगा। अब तक भारत की ओर से केवल एक एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें भारतीय नागरिकों को वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने तथा अपनी गतिविधियां सीमित रखने की सलाह दी गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वेनेजुएला में करीब 50 एनआरआई और 30 पीआईओ रहते हैं।
भारत और वेनेजुएला के बीच कैसे रहे रिश्ते – भारत और वेनेजुएला के बीच दशकों से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं, जिनकी वजह से वेनेजुएला भारत के लिए एक अहम तेल सप्लायर बनकर उभरा। भारत ने मादुरो की लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल नहीं उठाए, जैसा कि कई पश्चिमी और लैटिन अमेरिकी देशों ने किया है।
चीन क्यों हो रहा परेशान? – चीन को अमेरिका की उस योजना से चिंता है, जिसके तहत वह वेनेजुएला के तेल उद्योग को चलाना चाहता है, क्योंकि कराकस के कच्चे तेल के निर्यात का करीब 80% चीन को जाता है। अमेरिका लंबे समय से चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए दक्षिण अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित रहा है। इसी के चलते ट्रंप प्रशासन ने ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ का हवाला दिया है, जो 1823 में किए गए उस दावे की पुनरावृत्ति है, जिसमें दक्षिणी गोलार्ध को अमेरिका का प्रभाव क्षेत्र बताया गया था।