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भारत-यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील, पीएम मोदी ने एक मैसेज के साथ कैसे 27 देशों को साधा


साल 2014 की बात है जब नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार प्रधानमंत्री बने तो विश्व स्तर पर उनकी बातें हो रही थी। ब्रिटेन के एक अखबार ने उस दौरान उनके बारे में छापा था कि ‘भारत का पहला सोशल मीडिया प्रधानमंत्री’। ऐसा लगता है कि आज 12 सालों के बाद पीएम मोदी ने इसी सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचने की कला हासिल कर ली है।
मंगलवार को भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ट्रेड डील के बाद पीएम मोदी ने इस उपलब्धि का चतुराई से इस्तेमाल करते हुए यूरोप के लाखों लोगों तक अपनी पहुंच बना ली। दरअसल भारत-ईयू ट्रेड डील की जानकारी पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंटर से 24 अलग-अलग भाषाओं में पोस्ट की।
पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक – जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट इसे पीएम मोदी का बहुभाषीय मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं। क्योंकि नरेंद्र मोदी ने अलग-अलग भाषाओं में इन पोस्ट के जरिए 27 देशों में अपनी बात पहुंच बना ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदलती नितियों की वजह से दुनियाभर में हो रही उथल-पुथल के बीच भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ काफी अहम मानी जा रही है।
प्रोफेसर मारियोस ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने भाषाई विविधता को अपनाकर एक व्यापार समझौते को सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सांस्कृतिक हैंडशेक में बदल दिया। उनका कहना है कि इससे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं लगा, बल्कि वह मानवीय और व्यक्तिगत जुड़ाव जैसा महसूस हुआ।
27 देशों को अलग-अलग भाषाओं में दिया धन्यवाद – अमेरिकी के दवाब के बीच यूरोपीय यूनियन के साथ हुई यह ट्रेड डील काफी अहम है। दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद 27 जनवरी को फाइनल हुई यह डील सिर्फ एक डील नहीं बल्कि भारत का यूरोप में बढ़ती सक्रियता भी है। यही कारण है पीएम मोदी ने इस डील के बाद यूरोपीय यूनियन में शामिल सभी 27 देशों को अलग-अलग भाषाओं में धन्यवाद दिया।
अमेरिकी दबाव के बीच अहम है यह डील – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों का गंभीर असर भारत और यूरोपीय यूनियन दोनों पर पड़ा है। भारत जहां एक ओर 50 प्रतिशत का टैरिफ झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के पक्ष में एकतरफा व्यापार समझौते को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। यूरोपीय यूनियन भी ट्रंप से त्रस्त है, यूरोप को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ग्रीनलैंड पर कब्जे के विरोध के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापार वार्ताओं में टैरिफ का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करना और सहयोगी देशों समेत अन्य देशों को दंडित करना यह ट्रंप की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है।