Tuesday , March 10 2026 7:29 AM
Home / Uncategorized / भारत ने समंदर में दबा रखीं हैं खतरनाक पनडुब्बियां, चीन-पाकिस्तान छू भी नहीं पाएंगे

भारत ने समंदर में दबा रखीं हैं खतरनाक पनडुब्बियां, चीन-पाकिस्तान छू भी नहीं पाएंगे


भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है।
भारतीय नौसेना के बेड़े में 20-21 घातक पनडुब्बियां – मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है।
वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है।
आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे।
भारतीय पनडुब्बियों की तैनाती इन जगहों पर – NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है।
दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे।
भारत के इन समुद्रों में तैनात हैं ये पनडुब्बियां – फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं।
भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं।
परमाणु पनडुब्बियां आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात – भारत का परमाणु-संचालित पनडुब्बी कार्यक्रम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विशाखापत्तनम स्थित भारतीय नौसेना के प्रबंधन एवं संचालन (M&O) के अधीन है।
भारत ने अगस्त 2016 में अपनी पहली एटीवी पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को कमीशन करके अपनी तीन परमाणु पनडुब्बियों को परिचालन में लाने के लिए कदम उठाए।
आईएनएस अरिहंत लगभग 700 किमी की रेंज वाली 12 सागरिका (K-15) पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBM) के साथ-साथ परमाणु-सक्षम निर्भय क्रूज मिसाइलों के संस्करणों को ले जाती है।
आईएनएस अरिघात के समुद्री परीक्षण पूरे – नवंबर 2017 में, भारत ने चार नियोजित अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों में से दूसरी आईएनएस अरिघात का शुभारंभ किया। वहीं, भारतीय नौसेना ने वडोदरा स्थित जहाज निर्माण केंद्र में शेष दो अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियों एस-3 और एस-4 का निर्माण शुरू कर दिया है।
अरिहंत के उत्तराधिकारी अरिहंत की K-15 वितरण प्रणाली के स्थान पर लंबी दूरी की K-4 (3,500 किमी) एसएलबीएम से लैस हैं। इस श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी, अरिघात ने हाल ही में समुद्री परीक्षण पूरे किए हैं और इसके जल्द ही सेवा में शामिल होने की उम्मीद है।
रूस से पट्टे पर ली है एक परमाणु पनडुब्बी – रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2019 में भारत और रूस ने एक और अकुला श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी को 10 वर्षों के लिए भारत को पट्टे पर देने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
चक्र-III नामक नया पोत 2025 तक भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की उम्मीद थी। इससे भारत अगले 5 वर्षों तक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी के बिना रह जाएगा।
न्यूक्लिर पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां कब तक – इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी।
भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।
नई परमाणु हमलावर पनडुब्बियां कहीं अधिक गुप्त क्षमता वाली होंगी और पारंपरिक हथियारों से लैस होंगी। सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति ने अक्टूबर में 35,000 करोड़ रुपये के इस अधिग्रहण को मंजूरी दी थी, जिसमें से एक महत्वपूर्ण कार्य प्राइवेट इंडस्ट्री द्वारा किए जाने की संभावना है।
भारत को जर्मनी, फ्रांस और रूस दे रहे हैं मदद – वर्तमान में, भारत के पास छह स्कॉर्पीन श्रेणी (फ्रांसीसी), चार हार्डवुड (जर्मन) और सात किलो श्रेणी (रूसी) पनडुब्बियां शामिल हैं। स्कॉर्पीन पनडुब्बियां बिल्कुल नई हैं, इसलिए इनकी उपलब्धता दर काफी अधिक है। इसके बाद जर्मन हार्डवुड पनडुब्बियां आती हैं, जो सबसे भरोसेमंद और उच्च प्रदर्शन वाली हैं। ये पनडुब्बियां अगले 10-15 वर्षों तक हमारे काम आएंगी।
फरवरी 2025 में, भारतीय नौसेना ने जर्मन इंजीनियरिंग कंपनी थिसेनक्रुप के साथ 6 नई डीजल पनडुब्बियों के निर्माण के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किए। पनडुब्बियों का डिजाइन जर्मनी में होगा, लेकिन उन्हें भारत में असेंबल किया जाएगा।
भारतीय नौसेना के बेड़े में छोटी पनडुब्बियां भी – टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, नौसेना के पास अभी 140 युद्धपोत हैं, जिनमें 17 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां (जिनमें से 11 बहुत पुरानी हैं) और दो एसएसबीएन (छोटी पनडुब्बी) शामिल हैं। साथ ही 250 से अधिक विमान और हेलीकॉप्टर भी हैं।
पुराने युद्धपोतों को धीरे-धीरे सेवामुक्त करने के साथ, अगले दशक में नौसेना बल को 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों, 350 नौसैनिक विमानों और हेलीकॉप्टरों तक बढ़ाने की योजना है। एक अन्य अधिकारी ने कहा-2037 तक नौसेना बल का स्तर 230 युद्धपोतों तक भी पहुंच सकता है।
कलवरी क्लास की आईएनएस खंडेरी की तैनाती जल्द – हाल ही में भारत की दूसरी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी में 2026 के अंत से पहले स्वदेशी रूप से विकसित वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (AIP) प्रणाली लगाई जाएगी, जो भारतीय नौसेना की जलमग्न युद्ध क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
मीडिया रिपोर्ट में वरिष्ठ रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पुणे स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एनएमआरएल) द्वारा विकसित एआईपी प्रणाली ने व्यापक तट-आधारित परीक्षण सफलतापूर्वक पास कर लिए हैं। आईएनएस खंडेरी पर एकीकरण कार्य दिसंबर 2026 से पहले पूरा होने की उम्मीद है, जबकि पनडुब्बी मरम्मत के लिए डॉक पर है।
चीन तेजीी से बढ़ा रहा हिंद महासागर में पैठ – रिपोर्ट के अनुसार, 370 युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना होने के नाते चीन हिंद महासागर क्षेत्र में तेजी से अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
चीन अफ्रीका के हॉर्न पर जिबूती, पाकिस्तान में कराची और ग्वादर और कंबोडिया में रीम के बाद और अधिक विदेशी ठिकानों और भंडारण सुविधाओं की तलाश कर रहा है।
पाकिस्तान की पनडुब्बियों की क्षमता भी बढ़ा रहा चीन – रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपने साथ ही पाकिस्तान को भी अपनी नौसैनिक क्षमताओं को बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। पाकिस्तान को चीन से वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (AIP) से लैस आठ युआन या हैंगोर श्रेणी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलेंगी, जिससे उसकी जलमग्नता क्षमता में वृद्धि होगी।
अधिकारी ने कहा-पाकिस्तान के पास वर्तमान में पांच पुरानी अगोस्टा श्रेणी की पनडुब्बियां हैं। अगले वर्ष से हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों के शामिल होने से समुद्री प्रतिरोध क्षमता में भारी वृद्धि होगी।