
अमेरिका-ईरान युद्ध का असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। मगर, इसके बाद भी भारत अपने पड़ोसियों के लिए दरियादिली दिखाता रहा है। मौजूदा संकट तेल और गैस का है। बांग्लादेश ने अगले चार महीने के लिए भारत से 50 हजार मीट्रिक टन डीजल देने की अपील की थी। इस मांग के बाद 10 मार्च को भारत से 5,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंच भी गया है। भारत इसी तरह नेपाल और श्रीलंका के लिए भी तेल संकट के दौरान खेवनहार बनकर उभरा है। दरअसल, यह भारत की पड़ोसी पहले की नीति (Neighborhood First Policy) के तहत है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘5S’ रणनीति भी है।
भारत-बांग्लादेश: दोस्ती की पाइपलाइन – न्यूज 18 की एक खबर के अनुसार, भारत-बांग्लादेश मित्रता पाइपलाइन (IBFP) का उद्घाटन 2023 में किया गया था। इसके तहत हाई स्पीड डीजल असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से बांग्लादेश की पार्बतीपुरी डिपो तक पहुंचाई जाती है।
खासतौर पर धान (बांग्लादेश में धान की किस्म बोरो) की सिंचाई के वक्त किफायती डीजल की आपूर्ति इससे किए जाने की बात कही गई है। पूरे बंगाल क्षेत्र में औस, अमन, बोरो उगाया जाता है।
बोरो धान की किस्म को सर्दियों में बोया जाता है, जो अप्रैल-मई तक तैयार होती है। बांग्लादेश हर साल नुमालीगढ़ रिफाइनरी से 1,80,000 टन डीजल आयात करता है।
श्रीलंका: संकट में भी देता है तेल – भारत हमेशा से श्रीलंका की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सहारा देता आया है। भारत और श्रीलंका त्रिकोनमेली ऑयल टैंक फॉर्म विकसित कर रहे हैं, जो श्रीलंका की एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रिजर्व के तौर पर बनाया जा रहा है।
2022 में भारत ने आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका को 3 बिलियन डॉलर की आपात सहायता दी थी, जिसमें महत्वपूर्ण रूस से ईंधन तेल भी था। 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन को बढ़ाकर 200 मिलियन डॉलर तक कर दिया गया।
भारत ने बीते साल दिसंबर में ही श्रीलंका को चक्रवाती तूफान आने के बाद 450 मिलियन डॉलन की पुनर्निर्माण सहायता दी थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तब कहा था कि भारत हमेशा से श्रीलंका के साथ है।
नेपाल: भारत पर 100 फीसदी टिकी हैं तेल जरूरतें – भारत पेट्रोल-डीजल और विमानन टर्बाइन तेल (ATF) समेत नेपाल की 100 फीसदी तेल की जरूरतें पूरी करता है। मोतिहारी-अमलेखगंज पाइपलाइन पूरे दक्षिण एशिया की ऐसी पेट्रोलियम पाइपलाइन है, जो किफायती रूप से ऑयल की सप्लाई करती है।
इसके अलावा, चिटवान तक पाइपलाइन बिछाना और सिलीगुड़ी से झापा तक के लिए एक नई पाइपलाइन बनाने की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। भारत के कुल ईंधन निर्यात का करीब 28 फीसदी नेपाल ही जाता है।
पीएम मोदी की ‘5S’ रणनीति क्या है – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में आधिकारिक तौर पर नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी लॉन्च की थी। जिसमें पड़ोसियों के साथ 5 एस स्ट्रैटेजी अपनाई जाती है।
सम्मान: पड़ोसियों को अपने बराबर समझना
संवाद: लगातार कूटनीतिक संपर्क
शांति: क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना
समृद्धि: परस्पर लाभकारी आर्थिक ग्रोथ
संस्कृति: ऐतिहासिक और सांस्कृति संबंधों को बढ़ाना
पाकिस्तान-चीन चाहते हैं पूरे क्षेत्र पर अपनी धाक – भारत के खिलाफ पाकिस्तान और चीन इस पूरे इलाके में अपनी धाक जमाना चाहते हैं। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौर में चीन ने जहां बांग्लादेश के साथ मिलिट्री ड्रोन की फैक्ट्री लगाने का करार किया था।
वहीं, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बांग्लादेश में अपना दफ्तर तक खोल लिया था। हालांकि, अब तारिक अहमद की सरकार ने भारत से अच्छे रिश्ते रखने की वकालत की है।
वहीं, श्रीलंका और नेपाल में भी चीन ने बड़ा निवेश किया है। चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल के लिए पट्टे पर ले लिया है।
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