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स्पेस में भारत का दबदबा बरकरार, ISRO के ‘बाहुबली’ मिशन में जुटे वी. नारायणन के बारे में जानें सबकुछ


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। ISRO का अपना अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट लॉन्च सफल रहा है। इस मिशन में जुटे इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन के बारे में जानें सबकुछ।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ISRO ने आज भारत का एक अहम कॉमर्शियल मिशन लॉन्च किया। LVM3-M6 रॉकेट के जरिए अमेरिका की अगली पीढ़ी का कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का लॉन्च सफल रहा। इस रॉकेट की ताकत को देखते हुए इसे ‘बाहुबली’ कहा जाता है। इसरो की इस बड़ी लॉन्चिंग से पहले इसरो चीफ डॉ. वी. नारायणन ने तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने मिशन की सफलता की कामना की।
इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि LVM-3 M6 रॉकेट ने इस मिशन को अंजाम दिया है। यह सैटेलाइट अमेरिका का कम्युनिकेशन सैटेलाइट है और 4G और 5G संचार सेवाओं को सपोर्ट करेगा। इसका मतलब है कि यह सैटेलाइट हमारे मोबाइल फोन और इंटरनेट को और भी तेज और बेहतर बनाने में मदद करेगा।
कौन हैं वी. नारायणन? – वर्तमान इसरो चीफ वी. नारायणन देश के जाने-माने वैज्ञानिक और रॉकेट टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ हैं। वह इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) के निदेशक रह चुके हैं। यह इसरो का प्रमुख केंद्र है, जिसका मुख्यालय तिरुवनंतपुरम के वलियमाला में स्थित है। डॉ. नारायणन की शुरुआती शिक्षा तमिल भाषी स्कूलों में हुई। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में एम.टेक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। एम.टेक प्रोग्राम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया था।
इसरो के नए चीफ वी नारायण की पढ़ाई तमिल भाषी स्कूलों में हुई।
उन्होंने 1989 में IIT खड़गपुर से क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में MTECH किया।
एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में PHD की। एमटेक में पहली रैंक मिलने पर उन्हें सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया।
वी नारायणन ने स्कूल एजुकेशन, DME फर्स्ट रैंक और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में AMIE के साथ की।
अंतरिक्ष यान और रॉकेट में लगभग चालीस सालों का अनुभव है।
वे एक रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन एक्सपर्ट हैं।
डॉ. नारायणन के नेतृत्व में LPSC (लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम) ने कई ISRO मिशन के लिए 183 लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम और कंट्रोल पावर प्लांट दिए हैं।
1984 में शुरू की ISRO की यात्रा – डॉ. नारायणन ने 1984 में इसरो में अपनी वैज्ञानिक यात्रा शुरू की। 2018 में वह एलपीएससी के निदेशक बने। उनकी उपलब्धियों में GSLV Mk III व्हीकल का C25 क्रायोजेनिक प्रोजेक्ट शामिल है, जिसमें उन्होंने प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका निभाई।
कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानि‍त – इनमें आईआईटी खड़गपुर से रजत पदक।
एनडीआरएफ से राष्ट्रीय डिजाइन पुरस्कार।
एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई) से स्वर्ण पदक शामिल हैं।