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भारतीय महिलाएं भर रही हैं ‘मैरिज पेनाल्टी’, विश्व बैंक की रोजगार पर तैयार इस रिपोर्ट को तो पढ़ लीजिए


शादी के बाद महिलाओं को ससुराल में जॉब करने में काफी परेशानी आती है। काफी महिलाएं घर और बच्चों की जिम्मेदारी के चलते जॉब छोड़ने को मजबूर होती हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में यह बात कही कई है। रिपोर्ट के मुताबिक शादी के बाद करीब एक तिहाई महिलाएं जॉब छोड़ देती हैं।
अभी शादी कर लो, नौकरी ससुराल जाकर भी कर लेना… यह लाइन ज्यादातर भारतीय महिलाओं को अपने माता-पिता या परिवार के दूसरे लोगों से सुनने को मिलती है। ये वे महिलाएं होती हैं जो शादी से पहले जॉब कर रही होती हैं। लेकिन शादी के बाद भी वह अपनी जॉब जारी रख पाएंगी, इस पर हमेशा सवालिया निशान लगा रहता है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक शादी के बाद जॉब करने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या में गिरावट आई है। यानी महिलाओं को ‘मैरिज पेनाल्टी’ का सामना करना पड़ता है।
विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि शादी के बाद अगर पुरुष नौकरी करे तो उसे अच्छा माना जाता है और उसकी तारीफ होती है। वहीं महिलाओं के मामले में स्थिति बिल्कुल उलट है। ज्यादातर परिवार अपनी नई-नवेली बहू को नौकरी नहीं करने देते। चाहे वह महिला शादी से पहले अपने मायके में नौकरी क्यों न कर रही हो। इस कारण महिलाओं की नौकरी करने की दर में लगातार गिरावट आ रही है।
पुरुषों को मिलती है तवज्जो – रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक भारत में शादी के बाद महिला रोजगार दर में 12 फीसदी की गिरावट आई है, जो बच्चों की अनुपस्थिति में भी महिला के विवाह-पूर्व रोजगार दर का लगभग एक तिहाई है। इसके विपरीत, शादी के बाद पुरुषों के जॉब करने की दर में बढ़ोतरी देखी गई है। पुरुषों के लिए प्रीमियम 13 फीसदी अंकों का है।
बच्चों की देखभाल बड़ी जिम्मेदारी – रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और मालदीव में बिना बच्चों वाली महिलाओं के बीच शादी से जुड़े मानदंड शादी के पांच साल बाद तक बने रहते है। वहीं दूसरी ओर महिलाओं को बच्चों की जिम्मेदारी से जोड़कर भी देखा जाता है। इस कारण भी महिलाएं जॉब नहीं कर पातीं या उन्हें जॉब छोड़नी पड़ती है।
दक्षिण एशिया में भी गिरावट – महिलाओं की रोजगार दर में गिरावट सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में है। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण एशिया में ‘महिलाओं, नौकरियों और विकास’ पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद महिलाओं की रोजगार दर में गिरावट आई है। साल 2023 में दक्षिण एशिया में केवल 32% कामकाजी आयु की महिलाएं जॉब कर रही थीं। वहीं पुरुषों की रोजगार दर 77% थी। ऐसे में महिलाओं की भागीदारी काफी कम रही।
…तो बढ़ जाएगी जीडीपी – रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर महिलाओं के लिए श्रम शक्ति भागीदारी दर पुरुषों के बराबर बढ़ा दी जाए तो जीडीपी में तेजी आ जाएगी। रिपोर्ट कहती है कि ऐसा करने पर दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 13 से 51% अधिक होगा।