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इजरायली आयरन बीम लेजर वेपन क्या प्रभावी नहीं हो रहा? ईरान संग युद्ध में क्या दिक्कतें आ रही हैं? उठे सवाल


आयरन बीम इजरायल का लेजर एयर डिफेंस सिस्टम है। चीनी लेजर डिफेंस सिस्टम के सऊदी के रेगिस्तान में नाकाम होने के बाद पूरी दुनिया की नजर आयरन बीम पर थी। इसे बनाते सयम रॉकेट्स और ड्रोन स्वार्म के खिलाफ काफी कारगार होने का दावा किया गया था। पिछले साल दिसंबर में आयरन बीम को इजरायली सेना को सौंपा गया था। वहीं लेबनान से हमला शुरू होने के बाद इस हफ्ते इजरायली डिफेंस फोर्स ने पुष्टि की है कि आयरन बीम को एक्टिवेट कर दिया गया है। इसीलिए अब दुनिया में आयरन बीम की क्षमता और युद्ध के मैदान में उसकी कामयाबी को जानने की काफी दिलचस्पी है।
आयरन बीम पर भारत की भी नजर है। अगर ये कामयाब रहता है तो काफी कम कीमत में दुश्मनों के ड्रोन के झुंड को रोका जा सकता है। आधुनिक पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए काफी छोटे छोटे ड्रोन को रोकना काफी महंगा और मुश्किल भरा होता है। इसीलिए लेजर एयर डिफेंस सिस्टम पर काफी चर्चा होती रही है। आयरन बीम पिछले तीन दिनों से एक्टिव है और युद्धक्षेत्र में काम कर रहा है। पिछले दिनों में आयरन डोम ने कैसा प्रदर्शन किया है आइये जानते हैं।
आयरन बीम युद्ध क्षेत्र में कैसा प्रदर्शन कर रहा है? – इजरायल डिफेंस फोर्स ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें आयरन बीम को लेबनान से आने वाले रॉकेट को रोकने के लिए लेजर लाइट को फेंकते हुए दिखाया गया था। लेजर की तेज और गर्म किरणों के पड़ने से रॉकेट को फटते हुए देखा गया था। इसीलिए इस टेक्नोलॉजी को लेकर काफी दिलचस्पी रही है। इजरायल जमीन पर लेजर एयर डिफेंस लगाने में सबसे आगे रहा है। इजरायल और अमेरिका के साथ साथ चीन और भारत भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहे हैं।
लेजर डिफेंस सिस्टम को ऑपरेट करना काफी कम खर्चीला है। इसका मतलब है कि वे ईरान में बने सस्ते शाहेद 136 ड्रोन जैसे खतरों को खत्म करने के लिए बड़ी संख्या में मिसाइल इंटरसेप्टर इस्तेमाल करने की लागत कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि युद्ध के मैदान में पता चला है कि लेजर डिफेंस सिस्टम की क्षमता अभी भी सीमित है। इजरायल का रफायल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम एक ग्राउंड-बेस्ड लेजर सिस्टम पर काम कर रहा था जिसे आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के साथ काम करना था।
आयरन डोम के साथ आयरन बीम कर रहा काम – आयरन डोम, इजरायल के मल्टी-टियर एयर डिफेंस सिस्टम का एक हिस्सा है। यह डेविड के स्लिंग और एरो एयर डिफेंस सिस्टम के साथ कम दूरी के डिफेंस सिस्टम के तौर पर काम कर रहा है। लेजर कम दूरी के होते हैं। जिस समय इजरायल जमीन पर आधारित सिस्टम पर काम कर रहा था, उसी समय इजरायल का एल्बिट सिस्टम भी एक ऐसे लेजर सिस्टम पर काम कर रहा था जिसका इस्तेमाल हवा से किया जा सकता है। युद्ध क्षेत्र से पता चला है कि हवाई जहाज या ड्रोन पर लेजर लगाने से सिस्टम की क्षमताएं और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
आयरन बीम में किन दिक्कतों का पता चला है? – क्षेत्र के हिसाब से क्षमता पर असर- आयरन बीम को लेकर पता चला है कि जमीन से जब लेजर लाइट को लॉन्च किया जाता है तो क्षेत्र के हिसाब से उसकी क्षमता पर असर पड़ता है। आयरन बीम के साथ भी कुछ कुछ वैसा ही है जैसा चीनी लेजर एयर डिफेंस सऊदी के रेगिस्तान में नाकाम हो गया।
हिट करने के लिए टारगेट का दिखना जरूरी- इसका मतलब है कि उन्हें बिल्डिंग या पहाड़ों के पार से शूट नहीं किया जा सकता। जिस टारगेट को शूट करना है उस टारेट को उन्हें देखना ही होगा। वियॉन्ड विजुअल रेंज क्षमता इनमें नहीं है। लेजर को टारगेट को जलाने और खतरे को खत्म करने के लिए कुछ समय तक टारगेट पर लगातार हिट करना जरूरी होता है।
मौसम से प्रदर्शन पर असर– आयरन बीम की क्षमता मौसम पर बहुत निर्भर करता है। उन पर एटमोस्फेरिक इंटरफेरेंस का भी असर पड़ता है, जैसे खराब मौसम या आसमान में धूल। लेजर छोटी बीम होती हैं और अगर बीम आसमान में मौजूद पार्टिकल्स से ब्लॉक हो जाती है तो उनका असर कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में कई छोटे लेजर का इस्तेमाल करके और उन्हें तेजी से बदलकर उन्हें टारगेट तक फेंका जा सकता है। फिर भी समस्या बनी रहती है और यही लेजर को मिसाइल इंटरसेप्टर से अलग बनाती हैं।
लेकिन इजरायल ने लेजर सिस्टम के कई वैरिएंट डेवलप किए हैं। इजरायल ने जो लेजर हथियार बनाए हैं उनकी क्षमताएं भी अलग अलग हैं। वे सभी हाई-एनर्जी लेजर हैं। इनमें लाइट बीम शामिल है, जो 10Kw का लेजर है, जबकि आयरन बीम-M 50Kw का लेजर है। आयरन बीम-M, जो लाइट बीम की तरह ही मोबाइल वैरिएंट है, उसे गाड़ी पर लगाया जा सकता है। जिस लेजर डिफेंस का बहुत इंतज़ार था उसे दिसंबर 2025 के आखिर में IDF के साथ तैनात किया गया।
लेजर हथियारों का भविष्य क्या होगा? – इजरायल डिफेंस फोर्स ने कई आयरन बीम को अलग अलग युद्धक्षेत्र में तैनात किया है। लेकिन अभी इनकी कामयाबी पर सवाल हैं। लेजर हथियार, एक तरह के स्टार वॉर्स के भविष्य की याद दिलाते हैं। हालांकि, स्टार वॉर्स और डेथ स्टार में X-Wing फाइटर्स के उलट आज लेजर का असल इस्तेमाल अभी भी बहुत कम है। आयरन बीम को लेकर कहा जाए तो इसमें लेजर तो है और ये नजर में आने वाले खतरों जैसे ड्रोन और रॉकेट के खिलाफ कारगर भी हुए हैं, फिर भी इनके भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं। फिलहाल ये साफ नहीं है कि ये किस तरह का हथियार बनने वाला है और यह भी साफ नहीं है कि कितने इस्तेमाल किए जाएंगे या उनका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा?
लेजर हथियारों की क्षमता में क्यों करना होगा इजाफा – फिलहाल लेजर हथियारों की रेंज सीमित है। लंबी दूरी के हवाई खतरों से निपटने के लिए दस किलोमीटर की रेंज कम है। उदाहरण के लिए ईरानी शाहेद 136 ड्रोन की रेंज लगभग 2,000 किलोमीटर है। इसका मतलब है कि लेजर इस ड्रोन के काफी ज्यादा करीब आने के बाद ही उसे रोकने की स्थिति में आ पाएगा। ऐसे में अगर ड्रोन में पैंतरेबाजी की क्षमता ज्यादा है तो वो लेजर हथियार को चकमा दे सकते हैं। ऐसे में लेजर हथियार को कारगर बनाने के लिए उन्हें भी ड्रोन के साथ इंटीग्रेट करके आसमान में उड़ाया जा सकता है।