
रूस ने अपनी सेनाओं को आदेश दिया है कि वो यूक्रेन के खेरसॉन से निकल जाये। 24 फरवरी को जब से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है तब से लेकर अब तक बस इसी शहर में उसे कामयाब मिल सकी है। अकेले इसी शहर पर रूसी सेनायें कब्जा कर पाई हैं। बुधवार को रूस की सरकारी मीडिया की तरफ से बताया गया है कि रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू की तरफ से सैनिकों को नीपर नदी के पश्चिमी किनारे से हटकर पूर्वी हिस्से पर मोर्चो संभालने के लिये कहा गया है। अभी तक इस घटनाक्रम पर यूक्रेन के अधिकारियों की तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया है।
जाल में फंसाने का तरीका – इन अधिकारियों की तरफ से चेतावनी दी जा चुकी है कि यूक्रेन की तरफ से आक्रामक हमलों से घबराकर रूस उसे जाल में फंसाने के लिये इस तरह के बयान देता है। अगर इस खबर की पुष्टि हो जाती है तो फिर युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सेना के लिए एक बड़ा झटका होगा, जो अब अपने नौवें महीने के अंत के करीब है। यूक्रेन की सेनाएं जहां देश के दक्षिणी हिस्से में आक्रामक हैं तो खेरसॉन में उन्हें कोई बड़ी उपलब्धि हाथ नहीं लग सकी है। खेरसॉन प्रांत न केवल यूक्रेन बल्कि रूस के लिये भी काफी महत्वपूर्ण है।
रणनीतिक तौर पर जरूरी – खेरसॉन का बॉर्डर क्रीमिया से सटा हुआ है और यह जगह रूस को काला सागर तक का जमीनी रास्ता मुहैया कराती है। साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। यूक्रेन की सेनाएं अगर इस क्षेत्र में आक्रामक रहती हैं तो फिर रूस एक बड़ी जीत से वंचित हो जायेगा। इस तरह की लड़ाई यूक्रेन को क्रीमिया के करीब ले आयेगी जिसे रूस अपने लिये रणनीतिक तौर पर बहुत जरूरी मानता है।
यूक्रेन के लिये बड़ा झटका – खेरसॉन की आबादी करीब दो लाख अस्सी हजार है। साल 2014 में क्रीमिया से अलग होकर ही खेरसॉन प्रांत का निर्माण हुआ था। यूक्रेन आज तक क्रीमिया के अलग होने के सदमे से उबर नहीं सका है। ऐसे में अगर खेरसॉन भी उसके हाथ से जाता है तो यह बड़ा झटका होगा। नीपर नदी के किनारे और काला सागर के मुहाने पर स्थित खेरसॉन एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है। जब से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है तब से ही यूक्रेनी मिलिट्री चिंता में है। नीपर नदी की वजह से भी खेरसॉन काफी अहम हो जाता है।
पानी की कमी से होगी मुश्किल – अगर यूक्रेन ने सप्लाई कट कर दी तो क्रीमिया को पानी नहीं मिल पायेगा। अगर रूस ने आपूर्ति में कटौती कर दी तो फिर यूक्रेन में संकट बढ़ जायेगा। यूक्रेन ने क्रीमिया के अलग होने के बाद से ही पानी समेत कई जरूरी चीजों की सप्लाई रोक दी थी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जब हमले की वजहों के बारे में बताया तो उनमें भी आपूर्ति को बाधित करना भी शामिल था। गर्मियों में यूक्रेन की मिलिट्री ने इस प्रांत के कुछ हिस्सों पर पूरी ताकत के साथ रूस को जवाब देने का प्रयास किया। यूक्रेन ने अमेरिका से मिले हिमर्स रॉकेट लॉन्चर्स का प्रयोग किया और नीपर नदी पर बने अहम पुल को निशाना बनाया।
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