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गलवान संकट के समय भी इजरायल बना था संकटमोचक, भारत को भेजे थे घातक हथियार, यूं ही नहीं कहलाता सच्चा दोस्त


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच डिफेंस सेक्टर में कई बड़े समझौते हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने भारत में कई घातक हथियार बनाने की मंजूरी दे दी है। ये कोई पहली बार बार नहीं है कि इजरायल भारत की हथियारों को लेकर मदद कर रहा है, बल्कि इससे पहले भी वो कई अहम मौकों पर अपनी दोस्ती का सबूत दे चुका है। भारत और इजरायल की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है। 1980 के दशक की शुरुआत में डिप्लोमैटिक रिश्ते बनने से पहले ही इजरायल ने भारत को कहूटा में पाकिस्तानी न्यूक्लियर साइट पर बमबारी करने के लिए एक जॉइंट ऑपरेशन का प्रस्ताव दिया था।
उस दौरान प्लान भी बना लिए गये थे और किन लड़ाकू विमानों से हमला करना था उसे भी चुन लिया गया था। लेकिन आखिरी वक्त में भारत पीछे हट गया था। अगर उस वक्त हमला होता तो पाकिस्तान कभी परमाणु बम नहीं बना पाता। भारत और इजरायल के बीच 1992 में डिप्लोमेटिक रिश्ते बने थे और 1999 में सिर्फ सात सालों के बाद कारगिल युद्ध के समय इजरायल ने कैसे हमारी मदद की थी ये किसी से छिपी बात नहीं है। मिराज-2000 फाइटर जेट से इजरायली बम ही पाकिस्तानी सेना से गिराए गये थे, जिससे पाकिस्तान के पैर उखड़ने लगे थे। वो समय इसलिए भी क्रिटिकल था क्योंकि 1998 के न्यूक्लियर टेस्ट के बाद पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगा रखा था।
कारगिल युद्ध में कैसे इजरायल ने की थी भारत की मदद – कारगिल युद्ध के समय इजरायल ने आपातकालीन आधार पर भारत को बोफोर्स हॉवित्जर के लिए 155 mm मोर्टार शेल, लेजर-गाइडेड प्रिसिजन एम्युनिशन और इंडियन एयर फोर्स के मिराज-2000 फाइटर जेट के लिए लाइटनिंग टारगेटिंग पॉड्स दिए थे। इन हथियारों ने पाकिस्तान की ऊंचाई पर जमी हुई जगहों के खिलाफ भारतीय जमीनी ऑपरेशन और आर्टिलरी बैराज को बनाए रखने में मदद की और IAF को लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार किए बिना पाकिस्तानी बंकरों पर सटीक हमले करने में मदद की। हालांकि कारगिल युद्ध की कहानी तो सभी लोगों को पता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गलवान घाटी संघर्ष के दौरान इजरायल ने हमारी कैसे मदद की थी।