
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह एक नवंबर को हुए चुनावों में संसद के लिए चुने गए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ परामर्श के बाद पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक नई सरकार बनाने का काम सौंपेंगे। इस कदम से देश में राजनीतिक गतिरोध खत्म होने की संभावना है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष से अंतिम चुनाव परिणाम प्राप्त होने पर हर्जोग ने बुधवार से तीन दिनों तक राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करने के बाद यह घोषणा की।
64 सदस्यों ने की सिफारिश – राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘इजरायल ल की संसद (नेसेट) के 64 सदस्यों ने राष्ट्रपति को सिफारिश की कि वह लिकुड के अध्यक्ष बेंजामिन नेतन्याहू एमके (केसेट के सदस्य) को सरकार बनाने का कार्य सौंपें। अट्ठाईस एमके सदस्यों ने येश एटिड पार्टी के अध्यक्ष यायर लैपिड एमके की सिफारिश की और केसेट के 28 सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले चार गुटों ने कोई भी सिफारिश नहीं करने का फैसला किया।’’
नेतन्याहू को राष्ट्रपति द्वारा जनादेश सौंपे जाने के 28 दिनों में सरकार बनानी होगी। हालांकि राष्ट्रपति के पास चौदह अतिरिक्त दिनों तक का विस्तार देने का कानूनी अधिकार है। नेतन्याहू साल 1996 में पहली बार देश के पीएम बने थे। साल 2003 से 2005 तक वह देश के वित्त मंत्री भी रहे हैं। चार साल से भी कम समय में हुए इसे पांचवें आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वापसी वोटिंग के समय ही तय हो गई थी।
नेतन्याहू इन चुनावों में बड़ी जीत के बाद फिर से सत्ता काबिज होने के लिए तैयार हैं। भारत के लिए भी नेतन्याहू का लौटना एक अच्छी खबर है। यूं तो भारत और इजरायल के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं लेकिन नेतन्याहू की वापसी इन संबंधों को एक नई दिशा की तरफ लेकर जायेगी। साल 2021 तक नेतन्याहू सत्ता में थे।
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